आज से अहमदाबाद में 4 दिन ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल, मांगें नहीं मानीं तो राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Ahmedabad Auto Taxi Strike: अहमदाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में आज से 10 सितंबर तक ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की हड़ताल शुरू हो गई है। यूनियनों के अनुसार, करीब 2 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सियों के पहिए थमने से शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ऑनलाइन माध्यम से बुक होने वाली सेवाओं में चालकों को पर्याप्त भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए यह आंदोलन किया जा रहा है।

यूनियन का कहना है कि हड़ताल के बावजूद स्कूल रिक्शा और वैन की सेवाएं जारी रहेंगी, जिससे स्कूली विद्यार्थियों और अभिभावकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कम किराया और बढ़ती महंगाई से परेशान चालक

ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के मुताबिक, सीएनजी की कीमतों और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन ऑनलाइन टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने वाले मंचों पर चालकों को उनकी मेहनत के अनुरूप भुगतान नहीं मिल रहा।

यूनियनों ने ओला, उबर, रैपिडो और भारत टैक्सी जैसी सेवाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रतिस्पर्धा के कारण यात्रियों से कम किराया लिया जाता है और इसका सीधा असर चालकों की आय पर पड़ता है।

चालकों का दावा है कि कई मामलों में उन्हें करीब 8 से 10 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान मिलता है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई और वाहन संचालन की बढ़ती लागत में इतनी कम आय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

मांगें नहीं मानीं तो पूरे गुजरात में आंदोलन

फिलहाल आंदोलन अहमदाबाद, गांधीनगर और साणंद क्षेत्र तक सीमित बताया जा रहा है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन की हड़ताल के बाद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे गुजरात में फैलाया जाएगा।

इसके साथ ही यूनियनों ने बड़े पैमाने पर रैली निकालने और आरटीओ तथा गांधीनगर स्थित संबंधित सरकारी कार्यालयों का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।

यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी

लगातार चार दिनों तक बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सियों के सड़कों से दूर रहने पर आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

खासकर दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, कॉलेज के विद्यार्थी और अन्य दैनिक यात्री प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और हवाई अड्डे तक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक परिवहन की जरूरत बढ़ सकती है।

हड़ताल के दौरान यात्रियों को सार्वजनिक बस, मेट्रो और अन्य उपलब्ध परिवहन साधनों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।