रेलवे ट्रैक पर बंदरों के आतंक से मिलेगी राहत, अहमदाबाद डिविजन 9.15 करोड़ रुपये खर्च कर लगाएगा एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस

30 हजार से अधिक OHE बिजली के खंभों पर लगाए जाएंगे एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस और बर्ड डिटरेंट डिस्क, बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं को रोकने की तैयारी

Western Railway Ahmedabad Division: पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद डिविजन ने ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) के बिजली के खंभों पर बंदरों के चढ़ने से होने वाली शॉर्ट सर्किट और ट्रेन परिचालन में बाधा की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। डिविजन में करीब 30 हजार से अधिक बिजली के खंभों पर एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस और बर्ड डिटरेंट डिस्क लगाए जाएंगे। इस पूरी योजना पर करीब 9.15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हर महीने बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या

अहमदाबाद डिविजन में 1,450 किलोमीटर से अधिक विद्युतीकृत रेल मार्ग है, जहां करीब 30 हजार से अधिक OHE खंभे मौजूद हैं।

रेलवे के अनुसार, चालू वर्ष में अब तक खंभों पर बंदरों के चढ़ने की 165 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने और रेल परिचालन प्रभावित होने की समस्या सामने आती है।

बंदरों के बिजली के संपर्क में आने से उनकी मौत होने के अलावा तार टूटने और शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। इससे कई बार ट्रेन परिचालन घंटों तक प्रभावित होने की स्थिति बन जाती है।

गांधीग्राम-बोटाद मार्ग पर प्रयोग सफल

इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे ने गांधीग्राम-बोटाद रेल मार्ग पर प्रयोग के तौर पर 1,050 से अधिक एंटी-मंकी डिवाइस लगाए थे। रेलवे के अनुसार, यह प्रयोग प्रभावी रहा।

इन उपकरणों की स्थापना के बाद ओवरहेड विद्युतीकरण लाइन को नुकसान और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।

इस परिणाम के बाद अब इस व्यवस्था का विस्तार गांधीग्राम-बोटाद के अलावा धोलका, पालनपुर मार्ग और साबरकांठा सेक्शन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।

कैसे काम करेगा एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस?

एंटी-मंकी या एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस आमतौर पर धातु, फाइबर या अन्य टिकाऊ सामग्री से बनी गोलाकार या शंकु जैसी संरचना होती है। इसे जमीन से कुछ ऊंचाई पर बिजली के खंभे के बीच वाले हिस्से में लगाया जाता है।

इसकी चिकनी और फिसलन वाली सतह के कारण बंदरों के लिए खंभे पर आगे चढ़ना मुश्किल हो जाता है। इससे उन्हें OHE उपकरण और बिजली के तारों तक पहुंचने से रोकने में मदद मिलती है।

पक्षियों से होने वाली शॉर्ट सर्किट की घटनाएं भी रोकने की कोशिश

रेलवे खंभों पर बर्ड डिटरेंट डिस्क भी लगाएगा। इनका उद्देश्य पक्षियों को खंभों पर घोंसला बनाने तथा सूखी टहनियां या अन्य सामग्री जमा करने से रोकना है।

घोंसले, सूखी टहनियों और कचरे के कारण बिजली के उपकरणों में शॉर्ट सर्किट होने का खतरा रहता है। बर्ड डिटरेंट सिस्टम ऐसे जोखिम को कम करने में मदद करेगा।

ट्रेन परिचालन और वन्यजीवों दोनों को फायदा

नई व्यवस्था से OHE में फॉल्ट और बिजली ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे ट्रेन परिचालन अधिक सुचारु रखने और यात्रियों को अनावश्यक देरी से बचाने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही बिजली के संपर्क में आने से बंदरों और पक्षियों की होने वाली मौतों को रोकने में भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।