भावनगर में नकली विदेशी शराब या लट्ठाकांड? FSL रिपोर्ट से पहले ही ‘लट्ठाकांड’ घोषित करने पर उठे सवाल

Bhavnagar Liquor Party Death Case: गुजरात में शराबबंदी के बावजूद भावनगर में कथित जहरीली नकली शराब के सेवन से 6 से अधिक लोगों की मौत और करीब 21 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने जांच स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को सौंप दी है। हालांकि, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही इस घटना को ‘लट्ठाकांड’ कहे जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं।

FSL रिपोर्ट से पहले शब्दावली पर सवाल

भावनगर मामले में पुलिस की ओर से घटना को लगातार ‘लट्ठाकांड’ के तौर पर संबोधित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कानूनी और तकनीकी दृष्टि से किसी जहरीले शराब मामले में इस्तेमाल हुए पदार्थ की वास्तविक प्रकृति और मौत के कारण की पुष्टि फॉरेंसिक जांच से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ी होती है।

अगर जांच में यह सामने आता है कि ब्रांडेड बोतलों में नकली विदेशी शराब भरकर बेची गई थी, तो मामला केवल जहरीली शराब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नकली शराब के निर्माण और वितरण के पूरे नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

‘लट्ठाकांड’ शब्द पर क्यों हो रही है चर्चा?

SMC की प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना को बार-बार ‘लट्ठाकांड’ कहे जाने के बाद इस शब्दावली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि FSL की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी मामले को निश्चित रूप से किस श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच और वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। केवल शब्दावली के आधार पर पुलिस या जांच एजेंसी की मंशा पर निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा।

नकली विदेशी शराब का नेटवर्क होने पर उठेंगे बड़े सवाल

अगर यह साबित होता है कि ब्रांडेड विदेशी शराब की बोतलों में नकली शराब भरकर उसे बाजार में बेचा गया था, तो स्थानीय स्तर पर नकली शराब के निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई नेटवर्क की जांच अहम होगी।

ऐसे में पुलिस और प्रोहिबिशन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ सकते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर नकली शराब का उत्पादन और वितरण कैसे हुआ।

क्या आरोपियों को कानूनी फायदा मिल सकता है?

मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए FSL रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी। शराब में कौन सा रसायन मिला था, उसकी मात्रा कितनी थी और मौत का सीधा कारण क्या था—इन सभी सवालों के जवाब वैज्ञानिक जांच से सामने आएंगे।

यदि जांच में सामने आए तथ्यों और पुलिस की शुरुआती थ्योरी में अंतर होता है, तो केस की धाराओं और अभियोजन की रणनीति पर भी उसका असर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल ‘लट्ठाकांड’ शब्द के इस्तेमाल से आरोपी अदालत से तकनीकी आधार पर बरी हो जाएंगे।

नकली विदेशी शराब और जहरीली शराब में अंतर

लट्ठा/जहरीली शराब: आम तौर पर अवैध तरीके से तैयार की गई शराब में जहरीले रसायनों की मिलावट के कारण गंभीर विषाक्तता हो सकती है। खास तौर पर मेथनॉल की मौजूदगी आंखों की रोशनी जाने, अंगों को नुकसान पहुंचने और मौत का कारण बन सकती है।

नकली विदेशी शराब: इसमें असली ब्रांड की बोतल, लेबल, सील या पैकेजिंग का इस्तेमाल करके नकली या अवैध तरल को विदेशी शराब के नाम पर बेचा जाता है। इसमें मौजूद रसायन और उसकी मात्रा के आधार पर यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।

इसलिए भावनगर मामले में असल सवाल यही है कि मृतकों और मरीजों के सैंपल में कौन सा पदार्थ मिला और जिस शराब का सेवन किया गया, वह वास्तव में किस प्रकार की थी। FSL रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही इस घटना की वैज्ञानिक और कानूनी प्रकृति स्पष्ट होगी।