
Bullet Train Project: देश की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना की प्रगति को लेकर सरकारी आंकड़ों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, जून तक इस परियोजना की भौतिक प्रगति 61 प्रतिशत थी, जो एक महीने बाद बढ़कर केवल 62 प्रतिशत हुई है। यानी 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में एक महीने के दौरान सिर्फ 1 प्रतिशत की प्रगति दर्ज की गई।
2026 तक पूरा करने का लक्ष्य, लेकिन रफ्तार पर सवाल
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को देश की सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजनाओं में गिना जाता है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की भौतिक प्रगति जून में 61 प्रतिशत थी, जबकि ताजा आंकड़ों में यह 62 प्रतिशत पहुंची है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है और अब तक करीब 60,966.90 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। परियोजना को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना का करीब 38 प्रतिशत काम अभी बाकी है। ऐसे में सरकारी आंकड़ों में एक महीने के दौरान केवल 1 प्रतिशत की प्रगति दर्ज होने से समय पर काम पूरा होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
7 रेलवे परियोजनाओं में मंजूर लागत से ज्यादा खर्च
सरकारी आंकड़ों में कुछ अन्य रेलवे परियोजनाओं में भी खर्च और काम की प्रगति के बीच अंतर दिखाई देता है।
- दाहोद-इंदौर रेल लाइन: 456 करोड़ रुपये की मंजूर लागत के मुकाबले 4,509.30 करोड़ रुपये खर्च, लेकिन काम सिर्फ 57 प्रतिशत।
- मियागाम-करजन-डभोई-समालाया: 484 करोड़ रुपये की मंजूर लागत के मुकाबले 816.25 करोड़ रुपये खर्च, जबकि काम 34 प्रतिशत।
- नई दिल्ली-मुंबई रूट पर स्पीड बढ़ाने का काम: 6,906 करोड़ रुपये की मंजूर लागत के मुकाबले 9,480.86 करोड़ रुपये खर्च, लेकिन काम 66 प्रतिशत।
- राजकोट-कानालुस: 1,091 करोड़ रुपये की मंजूर लागत के मुकाबले 1,107.75 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
इन आंकड़ों से परियोजनाओं की लागत, काम की गति और समयसीमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।



