
Delhi Medical Procurement Scam: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में हुए कथित ₹700 करोड़ के मेडिकल प्रोक्योरमेंट घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली की अदालत को बताया है कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) से जुड़ी खरीद की महत्वपूर्ण फाइलें आरोपियों द्वारा कथित तौर पर जानबूझकर नष्ट कर दी गईं।
इन फाइलों में X-Ray मशीन, C-Arm मशीन और लिनन समेत विभिन्न चिकित्सा सामानों की खरीद के लिए टेंडर तैयार करने, शर्तें तय करने तथा तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करने वाले अधिकारियों की जानकारी मौजूद थी। ACB के मुताबिक, ये दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते थे।
घोटाले के प्रमुख आरोपी और कोर्ट की कार्रवाई
इस मामले में पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल, पूर्व CPA डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और पूर्व CPA प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।
अदालत ने डॉ. विनोद कुमार रंगा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं, स्पेशल जज विद्या प्रकाश की अदालत ने पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए मानवीय आधार पर उन्हें चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है।
जांच शुरू होने के बाद एक आरोपी विदेश फरार
विजिलेंस विभाग की शिकायत के आधार पर इस मामले में 2 जून को FIR दर्ज की गई थी और 18 जून को पहली गिरफ्तारी हुई थी।
जांच में दवा सप्लायर और फार्मास्युटिकल कारोबारी राजीव रंगीला का नाम भी सामने आया है। वह जून के अंत में एक अन्य मामले में अग्रिम जमानत मिलने के बाद भारत छोड़कर फरार हो गया। ACB ने अदालत को बताया कि राजीव रंगीला अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
टेंडर में कथित मिलीभगत और सरकारी धन की हेराफेरी
ACB की जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से कुछ चुनिंदा एजेंसियों को ही टेंडर दिलाने की व्यवस्था की। इसके लिए टर्नओवर, अनुभव और कार्यक्षमता से जुड़ी शर्तों को कथित तौर पर इतना ऊंचा रखा गया कि अन्य योग्य बोलीदाता प्रक्रिया में शामिल ही न हो सकें।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अन्य व्यापारियों की रकम को दो साल से अधिक समय तक रोके रखा गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकारी धन को कथित तौर पर इधर-उधर करने के लिए सप्लाई से कोई सीधा संबंध नहीं रखने वाले लोगों के सैकड़ों बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए और बाद में इन रकम को नकद निकाल लिया गया।



