
West Bengal Nehru Statue Row: पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को कथित तौर पर उखाड़कर पास के जंगल में फेंकने का मामला सामने आया है। घटना के बाद कांग्रेस ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की है।
क्रेन से प्रतिमा हटाकर जंगल में फेंकने का आरोप
यह प्रतिमा दुर्गापुर के हर्षवर्धन प्राथमिक स्कूल के पास एक मेडिटेशन सेंटर के सामने लंबे समय से स्थापित थी। कांग्रेस का आरोप है कि 28 अगस्त को वहां रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। कार्यक्रम के लिए जगह खाली करने के लिए क्रेन की मदद से नेहरू की प्रतिमा को हटाया गया और बाद में स्कूल के पास झाड़ियों/जंगल में फेंक दिया गया।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में प्रतिमा जमीन पर पड़ी हुई और क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दे रही है। हालांकि, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान अभी आधिकारिक जांच का विषय है।
कांग्रेस ने पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
पश्चिम बर्धमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष देबेश चक्रवर्ती ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री की प्रतिमा के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने पुलिस को 24 घंटे के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर दोबारा स्थापित करने का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
पुलिस ने कांग्रेस की शिकायत प्राप्त कर ली है और मामले की जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
BJP ने आरोपों से किया इनकार
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने स्थानीय BJP नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय BJP नेतृत्व तथा दुर्गापुर पूर्व के विधायक की मौजूदगी थी।
वहीं, दुर्गापुर पूर्व के BJP विधायक चंद्रशेखर बनर्जी ने BJP की संलिप्तता से इनकार किया है। उनका दावा है कि कांग्रेस के एक गुट ने, जो कथित तौर पर TMC के साथ चला गया है, यह काम किया और बाद में BJP को बदनाम करने के लिए आरोप लगाए।
प्रतिमा विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
नेहरू की प्रतिमा को लेकर सामने आई तस्वीरों और कांग्रेस के आरोपों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिमा को किसने हटाया, किसके निर्देश पर हटाया गया और उसे जंगल में किस वजह से फेंका गया।
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कांग्रेस के अल्टीमेटम और BJP के पलटवार के बीच दुर्गापुर का यह मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।



