
Gen-Z Early Retirement Plans: भारत में रिटायरमेंट को लेकर सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां 58-60 साल की उम्र को सामान्य रिटायरमेंट की उम्र माना जाता था, वहीं अब बड़ी संख्या में शहरी भारतीय इससे पहले काम छोड़कर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना चाहते हैं। हालांकि, अर्ली रिटायरमेंट की इच्छा और वास्तविक वित्तीय तैयारी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
Axis Max Life Insurance की Bharosa Talks India Retirement Index Study (IRIS 6.0) के अनुसार, करीब 70% शहरी भारतीय अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी होने पर पारंपरिक 58-60 वर्ष की उम्र से पहले रिटायर होना चाहते हैं। इनमें से आधे लोग 50 वर्ष की उम्र से पहले FIRE (Financial Independence, Retire Early) हासिल करना चाहते हैं। यह अध्ययन 40 शहरों के 4,134 परिवारों में 25 से 65 वर्ष के कामकाजी लोगों के बीच जुलाई-अगस्त 2026 में किया गया था।
युवा उम्र से ही रिटायरमेंट की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 50% शहरी भारतीयों का मानना है कि पहली तनख्वाह मिलते ही रिटायरमेंट की योजना शुरू कर देनी चाहिए।
Gen-Z में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर जागरूकता और भी पहले दिखाई देती है। इस पीढ़ी के लोगों के अनुसार रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करने की आदर्श उम्र औसतन 29 वर्ष है। वहीं Millennials के लिए यह उम्र 31 वर्ष और Gen X के लिए 34 वर्ष है।
हालांकि, निवेश शुरू करने के मामले में Gen-Z अभी कुछ पीछे है। 62% Gen-Z उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दिया है। यह आंकड़ा Millennials में 70% और Gen X में 75% है।
जरूरत की रकम का अंदाजा है, लेकिन भरोसा नहीं
रिटायरमेंट के बाद मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए कितने पैसे चाहिए, इसका अंदाजा 61% शहरी भारतीयों को है। लेकिन बड़ी समस्या यह है कि केवल 11% लोगों को भरोसा है कि उनका रिटायरमेंट कॉर्पस पूरी जिंदगी चल पाएगा।
वहीं, 39% लोगों को आशंका है कि उनकी बचत पांच साल भी नहीं चल पाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी भारतीयों ने अपने अनुमानित रिटायरमेंट लक्ष्य की औसतन सिर्फ 28% रकम ही जमा की है। यही अर्ली रिटायरमेंट की इच्छा और वित्तीय तैयारी के बीच सबसे बड़ा अंतर दिखाता है।
क्या ₹1 करोड़ अब रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त नहीं?
रिपोर्ट में ₹1 करोड़ के पारंपरिक रिटायरमेंट लक्ष्य को लेकर भी बदलाव दिखाई देता है। 2025 में 77% शहरी भारतीयों का मानना था कि ₹1 करोड़ या उससे कम रकम आरामदायक रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त हो सकती है। 2026 में यह आंकड़ा घटकर 70% रह गया।
यानी अधिक लोगों को अब लगने लगा है कि महंगाई, जीवनशैली और भविष्य के स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए रिटायरमेंट के लिए ₹1 करोड़ से ज्यादा रकम की जरूरत पड़ सकती है। सालाना ₹15 लाख से अधिक आय वाले परिवारों में सिर्फ 51% लोग ₹1 करोड़ या उससे कम रकम को पर्याप्त मानते हैं।
हालांकि, रिटायरमेंट के लिए कोई एक निश्चित रकम सभी लोगों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। वास्तविक जरूरत उम्र, जीवनशैली, परिवार, महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और निवेश से मिलने वाले रिटर्न जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
देर से निवेश शुरू करने का पछतावा
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों को जल्दी निवेश शुरू न करने का पछतावा हो रहा है।
46 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 91% उत्तरदाताओं ने माना कि उन्हें रिटायरमेंट के लिए निवेश पहले शुरू करना चाहिए था। वहीं 82% Gen X+ लोगों को लगता है कि नियमित आय बनाए रखने के लिए उन्हें लंबे समय तक काम करते रहना पड़ सकता है।
रिटायरमेंट सिर्फ पैसों का नहीं, स्वास्थ्य का भी सवाल
IRIS 6.0 में रिटायरमेंट के दौरान स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण माना गया है। करीब 75% शहरी भारतीयों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद स्वस्थ और फिट रहेंगे। वहीं 52% लोगों ने बताया कि उनके पास स्वास्थ्य बीमा है और 44% लोग सप्ताह में 5-6 दिन शारीरिक गतिविधि करते हैं।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि रिटायरमेंट की तैयारी केवल बैंक बैलेंस बढ़ाने तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य की नियमित आय भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
विशेषज्ञ की राय
Axis Max Life Insurance के MD एवं CEO सुमित मदान के अनुसार, रिटायरमेंट को केवल नौकरी खत्म होने की उम्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आर्थिक स्वतंत्रता ऐसी स्थिति है जहां काम करना व्यक्ति की पसंद हो, मजबूरी नहीं।
अर्ली रिटायरमेंट का सपना, लेकिन तैयारी जरूरी
IRIS 6.0 के आंकड़े बताते हैं कि शहरी भारत में अर्ली रिटायरमेंट की इच्छा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पर्याप्त वित्तीय तैयारी अभी बड़ी चुनौती है। समय पर निवेश शुरू करना, अपने वास्तविक रिटायरमेंट लक्ष्य की गणना करना और स्वास्थ्य खर्चों के लिए अलग तैयारी करना इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
रिटायरमेंट किसी एक तय रकम का नाम नहीं है। हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए ₹1 करोड़ जैसे किसी एक आंकड़े को सार्वभौमिक रिटायरमेंट लक्ष्य मानना उचित नहीं होगा।



