
Gir Somnath Water Crisis: गिर सोमनाथ जिले के वेरावल और प्रभास पाटण क्षेत्र में इस वर्ष अपेक्षा के अनुरूप बारिश नहीं होने से आने वाले दिनों में जल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। सितंबर का पहला सप्ताह बीत चुका है और मानसून अब विदाई की ओर है। ऐसे में यदि मानसून के अंतिम दौर में अच्छी बारिश नहीं हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी के साथ खेती और पशुपालन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
हिरण-2 बांध में केवल 20.92% जलसंग्रह
वर्तमान जलस्तर की स्थिति पर नजर डालें तो जिले के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक बना हुआ है।
- हिरण-1: 28.65%
- हिरण-2: 20.92%
- सिंगोडा: 36.86%
- मच्छुंद्री: 47.92%
- रावल: 96.38%
मौजूदा स्थिति के अनुमान के अनुसार, हिरण-2 बांध का पानी करीब 31 दिसंबर 2026 तक चलने की संभावना है। वहीं हिरण-1 का जलसंग्रह भी लगभग 31 दिसंबर तक चलने का अनुमान है।
दूसरी ओर, ऊना-गिर गढ़डा क्षेत्र के मच्छुंद्री और रावल बांधों में उपलब्ध पानी 31 जुलाई 2027 तक चलने का अनुमान लगाया गया है।
उद्योगों के पानी में 50% कटौती की तैयारी
हिरण-2 बांध में सीमित जलसंग्रह को देखते हुए प्रशासन ने उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत पानी की कटौती की अग्रिम सूचना दी है।
जलसंकट की स्थिति में उपलब्ध पानी को प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे औद्योगिक इकाइयों को पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की संभावना है।
24 साल में तीसरी बार हिरण-2 के सामने ऐसी स्थिति
गिर सोमनाथ क्षेत्र में इस साल बारिश की कमी का असर बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2002-03 और 2012-13 में हिरण-2 बांध ओवरफ्लो नहीं हुआ था। अब 2026 में भी बांध के नहीं भरने की स्थिति सामने आई है।
इसी तरह वर्ष 1959 में बने कमलेश्वर बांध के इतिहास में अब तक 27 बार ओवरफ्लो होने की जानकारी है, लेकिन इस वर्ष यह बांध भी नहीं छलका। इससे क्षेत्र में इस मानसून के दौरान अपेक्षाकृत कम बारिश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गिर सोमनाथ में बारिश का आंकड़ा भी कम
7 सितंबर तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| क्षेत्र | सीजन की बारिश |
|---|---|
| गिर-गढडा | 288 मिमी |
| तलाला | 374 मिमी |
| पाटण-वेरावल | 617 मिमी |
| सूत्रापाड़ा | 666 मिमी |
| कोडिनार | 428 मिमी |
| ऊना | 514 मिमी |
स्थानीय स्तर पर इन आंकड़ों को पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम बताया जा रहा है। मानसून के अंतिम चरण में यदि अच्छी बारिश नहीं होती है तो इसका असर जलापूर्ति, सिंचाई, खेती और पशुपालन पर पड़ सकता है।
किसानों और पशुपालकों की बढ़ सकती है परेशानी
गिर सोमनाथ का ग्रामीण अर्थतंत्र खेती और पशुपालन पर काफी निर्भर है। बांधों में पानी की कमी लंबे समय तक बनी रही तो किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर निर्भर रहना पड़ेगा।
वहीं पशुपालकों के लिए भी चारे और पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। इसलिए क्षेत्र के लोगों की नजर अब मानसून के अंतिम दौर की संभावित बारिश पर टिकी हुई है।



