
Gujarat Pollution News 2026: अहमदाबाद की सड़कों पर रोजाना ऐसे कई वाहन नजर आते हैं जो चलते समय काला धुआं छोड़ते हैं। सामान्य आधे घंटे की यात्रा में ही 4 से 5 ऐसे वाहन दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं पीछे चल रहे दोपहिया वाहन चालकों के सीधे संपर्क में आता है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
वाहनों और महानगरपालिका के कचरा संग्रहण वाहनों से निकलने वाले धुएं के बीच अहमदाबाद में वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। वर्ष 2025-26 में शहर का वार्षिक PM10 स्तर 101 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी अहमदाबाद का स्तर निर्धारित सीमा से करीब 68% अधिक रहा।
गुजरात के कार्बन उत्सर्जन में वाहनों की बड़ी हिस्सेदारी
राज्य में लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या वायु प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना रही है। वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात के कुल CO₂ उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 13% थी।
अहमदाबाद जिले में स्थिति इससे भी गंभीर बताई गई है। यहां कुल कार्बन उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 36% तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि शहर में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हो चुका है।
CAG रिपोर्ट में सामने आया बड़ा आंकड़ा
वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण और PUC व्यवस्था को लेकर CAG की ऑडिट रिपोर्ट में भी गंभीर स्थिति सामने आई है।
मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में करीब 39.13 लाख वाहनों के PUC प्रमाणपत्र एक्सपायर हो चुके थे, इसके बावजूद ये वाहन सड़कों पर चल रहे थे।
इसके अलावा, 2009 से 2019 के बीच पंजीकृत करीब 69.29 लाख वाहनों ने 2019 से 2024 के बीच पांच साल की अवधि में एक बार भी अपना PUC प्रमाणपत्र रिन्यू नहीं कराया था।
CCTV और ई-चालान व्यवस्था पर भी सवाल
अहमदाबाद में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए 110 जंक्शनों पर 1,079 CCTV कैमरों के जरिए निगरानी और ई-चालान जारी करने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि, जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव कितना है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। अगर प्रदूषण फैलाने वाले वाहन लगातार बिना वैध PUC के सड़कों पर चलते रहें, तो केवल कैमरे और ई-चालान की व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित PUC जांच, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई और नियमों के प्रभावी अमल के बिना शहरों में बढ़ते वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण पाना मुश्किल होगा।



