गुजरात में अभी भी 24.52 लाख ग्रामीण घर नल कनेक्शन से वंचित, CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की खामियां उजागर

Gujarat CAG Report: गुजरात के हर ग्रामीण परिवार तक घर में नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 तक गुजरात में 72.14 लाख ग्रामीण घरों को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन देने का लक्ष्य था, लेकिन केवल 47.62 लाख घरों को ही कनेक्शन दिया गया। यानी करीब 24.52 लाख घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया।

इसके बावजूद राज्य के कई गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किए जाने पर भी ऑडिट में सवाल उठाए गए हैं।

लक्ष्य 72.14 लाख घरों का, कनेक्शन सिर्फ 47.62 लाख को

जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी। उस समय गुजरात के करीब 1.01 करोड़ ग्रामीण घरों में से 72.07 लाख घरों में नल कनेक्शन की आवश्यकता चिन्हित की गई थी। बाद में 72.14 लाख घरों के लिए योजनाओं को मंजूरी दी गई।

लेकिन नवंबर 2024 तक सिर्फ 47.62 लाख घरों को ही नल कनेक्शन दिया जा सका। इसके बावजूद गुजरात को ‘हर घर जल’ वाला राज्य घोषित कर दिया गया।

वहीं, केंद्र सरकार के आंकड़ों में गुजरात के 91.18 लाख ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन होने का दावा किया गया था। इन अलग-अलग आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।

नल लगा, लेकिन हर नल से पानी पहुंचा या नहीं?

केंद्र सरकार के सर्वेक्षण में ‘हर घर जल’ घोषित गांवों की जमीनी स्थिति भी सामने आई।

सर्वे के अनुसार:

  • 98.1% घरों में नल कनेक्शन पाया गया।
  • केवल 89.5% नलों में पानी की आपूर्ति हो रही थी।
  • 11.6% नल कनेक्शन उपयोग में नहीं थे।
  • 80.2% घरों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा था।
  • 83.6% घरों को निर्धारित समय के अनुसार पानी मिल रहा था।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि केवल घर तक पाइप या नल पहुंचा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति भी सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘हर घर जल’ घोषित गांवों की वास्तविक जांच जरूरी

CAG ने इस बात पर जोर दिया कि जिन गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किया गया है, वहां यह प्रभावी रूप से जांचना जरूरी है कि हर घर में नियमित पानी पहुंच रहा है या नहीं, नल कनेक्शन वास्तव में चालू हैं या नहीं और उपलब्ध पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।

ऑडिट में यह भी पाया गया कि कुछ गांवों को निर्धारित मानकों की पूरी उपलब्धि होने से पहले ही ‘हर घर जल’ घोषित कर दिया गया था।

टेंडर और निर्माण कार्य में देरी भी बनी समस्या

रिपोर्ट में योजना की तैयारी और कार्यान्वयन को लेकर भी कमियां बताई गई हैं। कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया में देरी, अनुबंध प्रबंधन की खामियां और विभिन्न प्रशासनिक कारणों से जलापूर्ति योजनाओं का काम समय पर पूरा नहीं हो सका।

इसके अलावा जमीन उपलब्ध न होना और डिजाइन की मंजूरी में देरी जैसी वजहों से भी परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई।

कागज पर नहीं, नल से पानी पहुंचने पर मानी जाए सफलता

CAG की टिप्पणियों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी गांव को ‘हर घर जल’ घोषित करने का आधार केवल कागजों में दर्ज नल कनेक्शन होना चाहिए या वास्तव में हर परिवार के नल से नियमित, पर्याप्त और स्वच्छ पानी पहुंचना

रिपोर्ट के आंकड़े इसी अंतर की ओर इशारा करते हैं। इसलिए घोषित ‘हर घर जल’ गांवों में कनेक्शन, जलापूर्ति की नियमितता और पानी की गुणवत्ता की दोबारा प्रभावी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।