
Gujarat Farmers: गुजरात में किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। 31 मार्च 2026 तक राज्य के किसानों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ₹74,176.52 करोड़ का कृषि ऋण बकाया बताया गया है। इस आंकड़े के आधार पर गुजरात देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां किसानों पर कृषि ऋण का बड़ा बोझ है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बकाया कृषि ऋण का मतलब यह नहीं है कि पूरी राशि डूबे हुए ऋण या एनपीए में बदल चुकी है। यह बैंकों द्वारा किसानों को दिए गए ऐसे कृषि ऋण की कुल बकाया राशि है, जिसकी देनदारी उस तारीख तक बनी हुई थी।
खेती की बढ़ती लागत ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
किसानों के सामने एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और कृषि मजदूरी पर खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ा है।
दूसरी ओर, भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाएं फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसानों की आय प्रभावित होती है और उन्हें अगली फसल के लिए दोबारा ऋण लेने की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि कृषि ऋण का बढ़ता बोझ किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता पैदा करता है।
देश के कई राज्यों में गुजरात से ज्यादा कृषि ऋण
संसद में उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कृषि ऋण का बकाया बोझ कई राज्यों में गुजरात से काफी अधिक है। तमिलनाडु में यह राशि ₹3.44 लाख करोड़ से अधिक बताई गई है, जबकि आंध्र प्रदेश भी गुजरात की तुलना में काफी आगे है।
वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में भी कृषि ऋण का बकाया गुजरात से अधिक बताया गया है।
इसलिए केवल कुल ऋण राशि के आधार पर किसानों की आर्थिक स्थिति की तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं देता। राज्य की किसान आबादी, कृषि क्षेत्र, प्रति किसान ऋण और ऋण चुकाने की क्षमता जैसे अन्य आंकड़े भी महत्वपूर्ण होते हैं।
गुजरात के कृषि ऋण में सहकारी बैंकों का आंकड़ा अलग
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ₹74,176.52 करोड़ का आंकड़ा किसानों पर मौजूद कुल कर्ज नहीं माना जा सकता।
किसानों द्वारा लिए गए सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के ऋण और अनौपचारिक उधारी को जोड़ने पर कुल देनदारी अलग हो सकती है। इसलिए इस आंकड़े को गुजरात के किसानों पर मौजूद कुल कर्ज के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य फिर चर्चा में
किसानों की आय बढ़ाने और उसे दोगुना करने का मुद्दा लंबे समय से केंद्र की कृषि नीति का हिस्सा रहा है। सरकार ने संसद में यह भी कहा है कि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं तथा नीतिगत उपायों के जरिए राज्यों के प्रयासों को समर्थन देती है।
सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कृषि अवसंरचना कोष जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख किया है।
हालांकि, बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और ऋण के दबाव के बीच किसानों की वास्तविक आय और आर्थिक स्थिति पर बहस लगातार जारी है।
क्या किसानों की कर्जमाफी होगी?
किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी समय-समय पर मांग उठती रही है। केंद्र सरकार ने पहले संसद में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार ने 2008 के बाद कोई व्यापक कृषि ऋण माफी योजना घोषित नहीं की है, जबकि राज्य सरकारें अपनी नीतियों और संसाधनों के आधार पर अलग-अलग ऋणमाफी योजनाएं लागू कर सकती हैं।
ऐसे में गुजरात के किसानों के लिए बढ़ता कृषि ऋण और उसकी अदायगी की क्षमता आने वाले समय में बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।



