
Love Marriage Registration: गुजरात में लंबे समय से चर्चा में रहे भागकर विवाह और प्रेम विवाह के पंजीकरण से जुड़े कानून में बदलाव का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पाटीदार समाज समेत कई सामाजिक संगठनों ने सरकार पर इस मामले में वादा करने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि फरवरी 2026 के विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने कानून में आवश्यक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने का भरोसा दिया था। लेकिन करीब छह महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कानूनी प्रक्रिया सामने नहीं आई है। गुजरात विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र में भी इस मुद्दे पर कोई विधायी कदम नहीं उठाए जाने से संगठनों की नाराजगी और बढ़ गई है।
माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने की मांग
पाटीदार समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांग है कि परिवार या माता-पिता की जानकारी और सहमति के बिना होने वाले भागकर विवाह के मामलों को लेकर पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव किया जाए।
संगठनों की मांग है कि प्रेम विवाह के आधिकारिक पंजीकरण के दौरान माता-पिता या स्थानीय गवाहों की लिखित सहमति को अनिवार्य किया जाए।
इसके अलावा, यदि किसी युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर विवाह कराया जाता है तो ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई का अधिकार देने की भी मांग की जा रही है।
विवाह पंजीकरण की स्थानीय स्तर पर जांच की मांग
सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि विवाह पंजीकरण केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्थानीय प्रशासन को दस्तावेजों और विवाह की वास्तविकता की उचित जांच करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर दिसंबर 2025 में गांधीनगर में पाटीदार समाज समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठक भी हुई थी।
संगठनों का दावा है कि बैठक में उनकी ओर से दिए गए सुझावों पर चर्चा हुई और सरकार ने कई मांगों को स्वीकार करते हुए आगे कार्रवाई का भरोसा दिया था।
फरवरी 2026 में सरकार ने किया था कानून में बदलाव का वादा
दिसंबर की बैठक के बाद फरवरी 2026 के विधानसभा सत्र के दौरान भी सरकार की ओर से कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ने का आश्वासन दिए जाने का दावा किया गया।
लेकिन सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इसके बाद इस मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उनका कहना है कि जिस मुद्दे पर सरकार ने कार्रवाई का भरोसा दिया था, वह अब सरकारी प्रक्रिया में अटका हुआ दिखाई दे रहा है।
‘सरकार ने सिर्फ पाटीदार समाज नहीं, सभी समाजों को निराश किया’
इस मुद्दे पर पाटीदार युवा नेता वरुण पटेल ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल पाटीदार समाज के साथ ही नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को लेकर चिंता करने वाले गुजरात के सभी समाजों के साथ विश्वासघात किया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन कानून बनाने की बात आती है तो सरकार पीछे हट जाती है। वरुण पटेल ने आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी।
हालांकि, प्रेम विवाह के पंजीकरण में माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाने जैसे प्रस्ताव कानूनी और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े संवेदनशील विषय हैं। इसलिए किसी भी बदलाव के लिए मौजूदा विवाह कानूनों और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना होगा।
अब आगे क्या होगा?
मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से सामाजिक संगठनों का दबाव बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर कोई कानूनी या प्रशासनिक रास्ता निकालती है या नहीं।
यदि संगठनों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



