रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भारत पर 100% शुल्क का खतरा! अमेरिकी संसद में नया संशोधन पेश

India-US Tariff: रूस पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका में प्रस्तावित कानून में कई महत्वपूर्ण संशोधन सामने आए हैं। ‘Lindsey Graham Sanctioning Russia and Iran Act’ के तहत रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। यह विधेयक पहले अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पारित हो चुका है और अब प्रतिनिधि सभा में इस पर चर्चा तथा संशोधनों का दौर चल रहा है।

भारत और चीन पर 100% तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव

विधेयक में प्रस्तावित एक संशोधन के तहत भारत और चीन जैसे रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों को सीधे निशाने पर लाने की मांग की गई है। प्रस्ताव में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के उत्पादों पर 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल करने की बात कही गई है।

यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर की ओर से पेश किया गया है। इसके तहत रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले बड़े व्यापारिक साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

एक सांसद ने शुल्क वाला प्रावधान हटाने की मांग की

दूसरी ओर, सांसद ग्रेगरी मीक्स ने विधेयक की धारा 113 में मौजूद शुल्क संबंधी प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव रखा है।

मीक्स और कुछ अन्य सांसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यापक शक्ति दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिनिधि सभा में विधेयक के अंतिम स्वरूप को लेकर राजनीतिक मतभेद भी सामने आ गए हैं।

रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ाना चाहते हैं दबाव

इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का आरोप है कि रूस को कच्चे तेल की बिक्री से होने वाली आय यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में आर्थिक मदद देती है।

प्रस्तावित कानून में रूस के तेल कारोबार से जुड़े जहाजों और उसके व्यापक समुद्री नेटवर्क पर भी कड़ी निगरानी तथा प्रतिबंधों का प्रावधान मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में यदि 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने वाला प्रावधान कानून का हिस्सा बनता है और भारत पर लागू किया जाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार, तेल आयात की लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

हालांकि, यह अभी प्रस्तावित संशोधन है, लागू हो चुका शुल्क नहीं। अंतिम प्रावधान और उसका वास्तविक दायरा अमेरिकी संसद में विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।