‘अमेरिका को जो करना है करे, हम रूस से तेल खरीदते रहेंगे…’ 100% टैरिफ की धमकी पर भारत का दो टूक जवाब

Donald Trump Tariff Threat and India Reply: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अमेरिकी पहल के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत ने कहा है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और तेल खरीद से जुड़े फैसले देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। हालांकि, 100 प्रतिशत टैरिफ अभी भारत पर लागू नहीं हुआ है; अमेरिका में संबंधित विधेयक अभी विधायी प्रक्रिया में है।

भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदता है और इस संबंध में फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

उन्होंने अमेरिकी विधेयक पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है और अमेरिका में संबंधित पक्षों के साथ विभिन्न स्तरों पर बातचीत भी जारी है।

क्या है ‘लिंडसे ग्राहम’ विधेयक?

अमेरिका में ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ नाम से विधेयक लाया गया है। अमेरिकी सीनेट ने इसे अगस्त में 86-11 वोट से पारित किया था। विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान भी है।

इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

भारत का नाम सीधे शामिल करने का प्रस्ताव

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए एक संशोधन में भारत समेत 10 देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले इन देशों को संभावित 100 प्रतिशत शुल्क के दायरे में रखा जा सकता है। हालांकि, दूसरे सांसदों ने इस प्रावधान को हटाने या उसमें बदलाव करने के प्रस्ताव भी रखे हैं।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग चुका है। विधेयक अभी अमेरिकी संसद की प्रक्रिया में है और अंतिम प्रावधान तथा उसके बाद राष्ट्रपति की कार्रवाई पर स्थिति निर्भर करेगी।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आगे बढ़ा विधेयक

15 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए 214-211 वोट से प्रक्रियात्मक मंजूरी दी। इसके बाद विधेयक अंतिम मतदान की दिशा में बढ़ा है।

विधेयक के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय और यूक्रेन युद्ध से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। वहीं, कुछ अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने को लेकर आपत्ति जताई है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में यदि अमेरिका भविष्य में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और भारतीय कंपनियों के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर पड़ सकता है।

फिलहाल भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और ऊर्जा जरूरतों पर आधारित है। इसलिए अमेरिकी विधेयक की अंतिम स्थिति सामने आने तक भारत की तेल खरीद नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।