Iran-US War 2026: ट्रंप ने ईरान का 7 दिन का प्रस्ताव ठुकराया, नवंबर के बाद फिर हमले की रिपोर्ट

Iran and USA War Updates: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की एक नई कोशिश को झटका लगा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप ने सहयोगियों से नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू करने की उम्मीद जताई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि नवंबर के बाद सैन्य कार्रवाई वास्तव में होगी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में संभावित सैन्य कार्रवाई के आकार और समय को भी निश्चित नहीं बताया गया है।

ईरान का 7 दिन का ‘हॉर्मुज प्लान’ क्या था?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बताया था कि तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को सात दिन की एक रूपरेखा भेजी है। इसके तहत कुछ अमेरिकी कदमों के बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।

प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में राहत देने और लेबनान सहित क्षेत्रीय स्तर पर युद्धविराम का पालन करने जैसे कदम उठाने थे। इसके बाद सात दिनों के भीतर हॉर्मुज को खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने की योजना थी।

7 दिन की प्रस्तावित समयसीमा

  • पहले चरण में: अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में राहत की मांग।
  • क्षेत्रीय स्तर पर: लेबनान को शामिल करते हुए युद्धविराम का पालन।
  • छठे/सातवें दिन: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने की योजना।
  • इसके बाद: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव।

रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जून में हुए एक समझौते की रूपरेखा से जोड़ा गया है, जो बाद में टूट गया था।

ट्रंप ने प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप को ईरान के साथ किसी समझौते की विश्वसनीयता को लेकर संदेह है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से हमले शुरू करने की उम्मीद जताई है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के साथ किसी संभावित समझौते की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं किया था। इसलिए मौजूदा स्थिति में कूटनीतिक प्रयास और सैन्य विकल्प दोनों चर्चा में बने हुए हैं।

हॉर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस जलमार्ग में जारी तनाव का असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ रहा है। ईरान द्वारा इसे दोबारा खोलने की पेशकश को इसी कारण महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव सामने आने के बाद तेल बाजार में भी इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

चीन ने भी बातचीत से समाधान की वकालत की

इस बीच चीन ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को लंबा खींचने के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि संघर्ष को जारी रखना संबंधित पक्षों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में नहीं है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी सार्वजनिक रूप से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा है कि अगर मुद्दों का समाधान संवाद से हो सकता है तो युद्ध का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता दोबारा खुलता है या तनाव और बढ़ता है। ट्रंप द्वारा ईरान के 7 दिन के प्रस्ताव को कथित रूप से खारिज किए जाने की रिपोर्ट के बावजूद, आगे की सैन्य कार्रवाई को निश्चित घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। आने वाले दिनों में दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और कूटनीतिक संपर्क से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।