कभी टीम इंडिया और BCCI के कॉन्ट्रैक्ट से बाहर हुए खिलाड़ी ने ठोके 270 रन, कप्तानी ने बदली ईशान किशन की पूरी कहानी

Ishan Kishan Career: भारतीय क्रिकेट टीम के तीनों प्रारूपों में खेल चुके ईशान किशन के करियर में एक ऐसा दौर भी आया था, जब उनका भविष्य अनिश्चित नजर आने लगा था। टीम इंडिया से बाहर होने के साथ ही उन्होंने बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध भी गंवा दिया और लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहे। लेकिन मुश्किल दौर में ईशान ने हार मानने के बजाय घरेलू क्रिकेट में खुद को दोबारा साबित करने का रास्ता चुना।

उनके करियर में सबसे बड़ा बदलाव बल्ले से पहले झारखंड की कप्तानी संभालने के बाद आया। कप्तानी ने उनकी सोच और खेल के तरीके को बदला और अब चेन्नई में खेली गई दुलीप ट्रॉफी फाइनल की 270 रनों की ऐतिहासिक पारी उनके बदलाव की बड़ी मिसाल बन गई है।

टीम इंडिया से बाहर हुए, BCCI का केंद्रीय अनुबंध भी गंवाया

2023 के मध्य तक ईशान किशन का करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। वेस्टइंडीज दौरे पर टेस्ट पदार्पण के बाद उन्हें भारतीय टीम के अहम खिलाड़ियों में गिना जाने लगा था। लेकिन इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं।

दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान ईशान ने टेस्ट शिविर छोड़ दिया था। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में खेलने को लेकर बीसीसीआई की अपेक्षाओं के अनुरूप उनकी भागीदारी नहीं हुई। इसका असर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर पड़ा और वह टीम इंडिया की योजनाओं से बाहर हो गए। साथ ही उन्होंने बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध भी गंवा दिया।

यही दौर उनके लिए वापसी की नई शुरुआत बना।

झारखंड की कप्तानी बनी करियर का बड़ा मोड़

घरेलू क्रिकेट में वापसी के दौरान ईशान को केवल बल्लेबाज की भूमिका नहीं मिली, बल्कि उन्होंने झारखंड की कप्तानी भी संभाली। यह जिम्मेदारी उनके क्रिकेट करियर में बड़ा बदलाव लेकर आई।

टीम के बारे में सोचने का नजरिया बदला

ईशान के मुताबिक, युवा खिलाड़ी के तौर पर उनका ध्यान मुख्य रूप से इस बात पर रहता था कि वह व्यक्तिगत रूप से कितना बड़ा स्कोर बना सकते हैं। कप्तानी मिलने के बाद उनकी सोच बदली और वह यह समझने लगे कि उनकी पारी से पूरी टीम को कितना फायदा हो रहा है।

साथियों की जिम्मेदारी भी समझी

कप्तान के तौर पर उन्हें सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान नहीं देना था। उन्हें अपने साथियों की गलतियों को समझना, उनकी मदद करना और टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के तरीके तलाशने पड़े।

आक्रामकता के साथ आया संयम

ईशान ने माना कि कप्तानी ने उन्हें एक व्यक्ति, क्रिकेटर और नेता के तौर पर काफी बदला है। इससे उन्हें अपने पुराने बेहद आक्रामक रवैये पर नियंत्रण रखने और परिस्थितियों के अनुसार अधिक धैर्य के साथ खेलने में मदद मिली।

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन से टीम इंडिया का रास्ता खुला

कप्तानी के साथ ईशान का बल्ला भी जमकर चला। 2025-26 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने शानदार शतक लगाए। इसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड ने खिताब जीता और ईशान ने दो शतकों की मदद से 517 रन बनाकर टीम की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई।

लगातार अच्छे प्रदर्शन का उन्हें फायदा मिला। पहले उनकी टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी हुई और फिर आईपीएल में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें वनडे टीम में भी जगह मिली।

दुलीप ट्रॉफी फाइनल में 270 रन, बदली मानसिकता का सबूत

चेन्नई में खेले गए दुलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान किशन की 270 रनों की पारी उनके बदले हुए खेल की शानदार मिसाल बनी।

टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था और बड़ा स्कोर खड़ा करना जरूरी था। ईशान की बल्लेबाजी की पहचान हमेशा से आक्रामक रही है, लेकिन इस पारी में उन्होंने शॉट चयन पर नियंत्रण रखा और परिस्थितियों के मुताबिक धैर्य के साथ लंबी पारी खेली।

ईशान के लिए यह 270 रन सिर्फ एक बड़ा व्यक्तिगत स्कोर नहीं है। यह उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने टीम इंडिया से बाहर होने, केंद्रीय अनुबंध गंवाने और लंबे अंतरराष्ट्रीय ब्रेक के बाद कप्तानी, घरेलू क्रिकेट और बदली हुई मानसिकता के दम पर खुद को फिर से स्थापित किया।