मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी: 12 नए मंत्रियों की हो सकती है एंट्री? जानिए किसका कटेगा पत्ता!

Modi Cabinet Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद अब राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के बाद अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि केंद्र सरकार में भी जल्द बदलाव देखने को मिल सकता है।

वर्तमान में केंद्र सरकार में कुल 69 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। इस हिसाब से सरकार के पास 12 नए मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश है। इसी आंकड़े ने कैबिनेट विस्तार की संभावनाओं को और हवा दे दी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

‘वन पर्सन, वन पोस्ट’ फॉर्मूले से बढ़ी हलचल

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में पीयूष गोयल, स्मृति ईरानी और अनुराग ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है।

इन नियुक्तियों के बाद भाजपा के ‘वन पर्सन, वन पोस्ट’ फॉर्मूले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि इस नीति को सख्ती से लागू किया जाता है तो संगठन और सरकार के बीच जिम्मेदारियों का संतुलन बनाने के लिए कुछ मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से हटाया जा सकता है या उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है।

पीयूष गोयल, हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी पर नजर

संभावित फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की हो रही है। उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी भी दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि वे मंत्री पद के साथ संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे या पूरी तरह संगठन के काम में सक्रिय होंगे। यदि वे संगठन में पूर्णकालिक भूमिका निभाते हैं तो वाणिज्य मंत्रालय किसी अन्य नेता को सौंपा जा सकता है।

वहीं हर्ष मल्होत्रा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं। अब दिल्ली भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने संगठन और सरकार की दोनों जिम्मेदारियां संभालने की चुनौती होगी।

पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, उनके राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बनाए भी रख सकती है।

12 पद खाली, राज्यों और सहयोगी दलों के समीकरण पर जोर

कैबिनेट में उपलब्ध 12 पदों को भरते समय क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

संभावित फोकस वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा है।

NDA सहयोगियों की एंट्री: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों को भी नए मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। महाराष्ट्र से एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के नेता श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में है।

पंजाब पर भी नजर: पंजाब के बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए वहां से किसी नए चेहरे को केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

सिर्फ नए मंत्री ही नहीं, मंत्रालयों में भी हो सकता है बदलाव

कैबिनेट में 12 पद खाली होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि केवल 12 नए चेहरों को ही शामिल किया जाएगा। वर्तमान सरकार में कुछ वरिष्ठ मंत्री एक से अधिक महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

ऐसे में फेरबदल के दौरान अतिरिक्त मंत्रालयों का बंटवारा दूसरे नेताओं के बीच किया जा सकता है। इससे प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के बीच राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी हो सकती है।

भाजपा संसदीय बोर्ड में भी बदलाव की चर्चा

कैबिनेट विस्तार के अलावा भाजपा के शीर्ष निर्णय लेने वाले संसदीय बोर्ड में भी बदलाव की अटकलें हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नामों की चर्चा हो रही है।

अगर इन नेताओं को संसदीय बोर्ड में जगह मिलती है तो भाजपा के भीतर नई पीढ़ी के नेतृत्व को और मजबूती मिलने के संकेत माने जाएंगे।

2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी पर भी नजर

भाजपा के संगठनात्मक बदलाव और संभावित कैबिनेट फेरबदल को अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को भी ध्यान में रखते हुए सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर सकती है।

हालांकि, मोदी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन को लेकर अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। लेकिन संभावित फेरबदल की चर्चाओं ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।