
RBI Cyber Fraud Guidelines: साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संदिग्ध ‘मनी म्यूल’ खातों से जुड़े लेनदेन पर अस्थायी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे खातों पर बैंक तत्काल अस्थायी डेबिट रोक लगा सकेंगे और खाताधारक को अपने खाते में आए संदिग्ध धन के स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाएगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये प्रस्तावित/ड्राफ्ट दिशानिर्देश हैं, अंतिम नियम नहीं।
किन खातों पर लग सकती है रोक?
प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत बैंक उन लेनदेन को संदिग्ध मानकर कार्रवाई कर सकते हैं जिन्हें उनकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियां मनी म्यूल गतिविधि के रूप में चिह्नित करें।
इसमें 1,000 रुपये या उससे अधिक के संदिग्ध लेनदेन, ग्राहक की सामान्य वित्तीय गतिविधि से अलग असामान्य लेनदेन तथा पहले साइबर धोखाधड़ी या मनी म्यूल गतिविधि के रूप में रिपोर्ट किए गए खातों से जुड़े लेनदेन शामिल हो सकते हैं।
मनी म्यूल ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है।
खाताधारक को मिलेगा स्पष्टीकरण का मौका
यदि किसी खाते पर अस्थायी डेबिट रोक लगाई जाती है, तो बैंक ग्राहक को लिखित रूप से इसकी जानकारी देकर खाते में हुई संदिग्ध गतिविधि के संबंध में स्पष्टीकरण मांगेंगे।
ग्राहक को अपना पक्ष रखने के लिए 20 दिन का समय देने का प्रस्ताव है। ग्राहक का जवाब मिलने के बाद बैंक को 10 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।
यदि ग्राहक की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो बैंक को अस्थायी रोक लगाए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा।
यदि बैंक ग्राहक के स्पष्टीकरण से संतुष्ट होता है, तो खाते पर लगाई गई रोक तुरंत हटानी होगी।
असंतोषजनक जवाब मिलने पर क्या होगा?
यदि बैंक ग्राहक के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होता है, तो रोक जारी रखी जा सकती है। ऐसे मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जानकारी देने का प्रावधान प्रस्तावित है।
यदि कानून प्रवर्तन एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी की ओर से रोक जारी रखने का निर्देश नहीं मिलता है, तो बैंक को निर्धारित अवधि के बाद रोक हटानी होगी। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे अस्थायी डेबिट रोक की कुल अवधि प्रारंभिक रोक की तारीख से अधिकतम 60 दिन तक हो सकती है।
बैंकिंग प्रणाली पर भी बढ़ेगी निगरानी
RBI ने प्रस्ताव में कहा है कि किसी पूरे खाते पर रोक लगाना अंतिम उपाय और केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।
बैंकों को संदिग्ध मनी म्यूल खातों और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन की पहचान के लिए तकनीक आधारित आंतरिक प्रणालियां विकसित करनी होंगी। संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट Financial Intelligence Unit-India (FIU-IND) को भी करनी होगी।
यदि किसी बैंक को मनी म्यूल खाता होने का पर्याप्त आधार मिलने के बावजूद आवश्यक संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है, तो इसे ग्राहक को जानने संबंधी KYC नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है।
ग्राहकों के दूसरे खातों की भी निगरानी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैंक को संदिग्ध खाते के साथ ग्राहक के अन्य सक्रिय खातों और बैंकिंग संबंधों की भी निगरानी करनी होगी।
साथ ही, अस्थायी रोक से जुड़े मामलों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें ग्राहक और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ हुए पत्राचार का रिकॉर्ड भी शामिल होगा। इन रिकॉर्ड को खाता बंद होने के बाद कम से कम 10 वर्ष तक सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है।
शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे
ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए बैंकों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे। इन अधिकारियों की जानकारी बैंक की वेबसाइट और शाखाओं पर उपलब्ध करानी होगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ऐसी शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर करने की व्यवस्था भी रखी गई है।
2 अक्टूबर तक मांगी गईं टिप्पणियां
RBI ने इस ड्राफ्ट व्यवस्था पर बैंकों, अन्य हितधारकों और आम जनता से 2 अक्टूबर तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
इसलिए फिलहाल इसे लागू नियम के बजाय प्रस्तावित ढांचा समझना जरूरी है। अंतिम दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही खातों पर रोक, समयसीमा और अन्य प्रावधानों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
महत्वपूर्ण: आपके दिए गए मसौदे में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की बात कही गई है, जबकि इसे ड्राफ्ट प्रस्ताव के रूप में भी वर्णित किया गया है। इसलिए प्रकाशन में इसे “प्रस्तावित नियम/ड्राफ्ट दिशानिर्देश” के रूप में लिखना अधिक सुरक्षित है, जब तक अंतिम RBI अधिसूचना से लागू होने की तारीख की पुष्टि न हो।



