हूती हमलों से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, मिस्र से मांगा समर्थन; लाल सागर में बढ़ा तनाव

Middle East Tensions: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 15 सितंबर को काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब यमन के हूती हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा और लाल सागर की महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक राहों पर दबाव बढ़ रहा है। मिस्र ने सऊदी अरब की सुरक्षा को अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़ा बताते हुए उसके साथ समर्थन और समन्वय की बात कही है।

सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद बढ़ी चिंता

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद इसे एहतियाती तौर पर बंद किया गया है। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है और होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हमले के ड्रोन इराक की दिशा से आने की जानकारी सामने आई है, जबकि हमले की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।

इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, इसके जरिए हाल के महीनों में प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।

लाल सागर के अहम इलाकों में हूतियों की बढ़त

इसी बीच हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर अपनी पकड़ मजबूत की है। रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने रणनीतिक मोखा बंदरगाह और पेरिम (मयून) द्वीप समेत बाब अल-मंदेब के आसपास के महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण बढ़ाया है। इससे लाल सागर और बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

15 सितंबर को मिस्र और सऊदी अरब ने लाल सागर, बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर जोर दिया।

यमन में मानवीय संकट गहराया

यमन में संघर्ष तेज होने के साथ मानवीय स्थिति भी बिगड़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार, हालिया संघर्ष के कारण एक लाख से अधिक लोग देश के भीतर विस्थापित हो चुके हैं, जबकि हजारों अन्य लोगों ने समुद्र के रास्ते जिबूती की ओर पलायन किया है।

संघर्ष के कारण नागरिकों के लिए मानवीय सहायता पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। सुरक्षा संबंधी चुनौतियों, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और आवाजाही पर प्रतिबंधों ने राहत कार्यों को प्रभावित किया है।

अमेरिका-ईरान तनाव का भी असर

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान के बीच जारी व्यापक सैन्य और कूटनीतिक तनाव भी है। लाल सागर और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ती अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

गाजा में भी संघर्ष और मानवीय स्थिति को लेकर सऊदी अरब और मिस्र ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। काहिरा बैठक में दोनों देशों ने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने और क्षेत्र में स्थायी समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

तेल बाजार पर बढ़ रहा दबाव

सऊदी तेल पाइपलाइन के बंद होने और लाल सागर के आसपास हूती नियंत्रण बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है।

ऐसे में सऊदी अरब के लिए लाल सागर और बाब अल-मंदेब की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उसके तेल निर्यात और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से भी जुड़ा हुआ है।