सऊदी अरब की एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव: हूती हमलों के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, पाकिस्तान और मिस्र से मांगी मदद

Saudi Arabia Missile Defense: यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब के मिसाइल रक्षा तंत्र पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से हवाई सुरक्षा सहायता मांगी है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब हूती हमलों के बीच सऊदी अरब को इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

सहयोगी देशों से एयर डिफेंस सहायता की मांग

दो क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब हूती विद्रोहियों और अन्य ईरान समर्थित समूहों की ओर से किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए सहयोगी देशों से सहायता मांग रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने फ्रांस, पाकिस्तान, मिस्र और ब्रिटेन से एयर डिफेंस सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। हालांकि, अभी तक इनमें से किसी देश की ओर से सऊदी अरब में सैन्य एयर डिफेंस तैनात करने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

इस बीच, अमेरिका भी अपने इंटरसेप्टर भंडार पर दबाव का सामना कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के साथ चल रहे छह महीने लंबे युद्ध के दौरान अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार में कमी आई है।

हूतियों का दावा- सऊदी F-15 लड़ाकू विमान मार गिराया

इसी बीच हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि संगठन ने यमन के मारिब प्रांत के ऊपर सऊदी अरब का एक F-15 लड़ाकू विमान मार गिराया।

हूती प्रवक्ता के मुताबिक, विमान को स्थानीय स्तर पर निर्मित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाया गया। हूतियों ने कथित रूप से विमान के मलबे का वीडियो भी जारी किया है।

हालांकि, सऊदी अरब ने इस दावे की तत्काल पुष्टि नहीं की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जारी वीडियो में मलबा दिखाई देता है, लेकिन उसके स्थान और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मक्का के पास ड्रोन को लेकर भी बढ़ा तनाव

इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोककर नष्ट कर दिया।

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मक्का की सुरक्षा को ‘रेड लाइन’ बताया है। दूसरी ओर, हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है। हूतियों का कहना है कि उनके हमलों का लक्ष्य सऊदी के सैन्य ठिकाने और तेल प्रतिष्ठान हैं।

लाल सागर और तेल प्रतिष्ठानों पर भी खतरा

हूती हमलों के कारण लाल सागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरों के बीच तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ा है।

रॉयटर्स के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने बाजारों को प्रभावित किया है। सऊदी अरब से जुड़े ऊर्जा ढांचे पर हमलों और लाल सागर क्षेत्र में बढ़े जोखिम के कारण वैश्विक तेल बाजार भी दबाव में है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यमन संघर्ष को एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।