
Stock Market News: शुक्रवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 740 से अधिक अंक गिरकर करीब 74,160 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी लगभग 250 अंक टूटकर 23,231 के आसपास आ गया।
अचानक बढ़ी बिकवाली के कारण शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का दावा किया गया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी करीब डेढ़ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
5 मिनट में निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये घटे
शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली के दबाव से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 478 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुरुआती पांच मिनट में ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट देखने को मिली।
बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव दिखाई दिया।
बाजार में गिरावट के 3 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमत 109 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फिर तेजी से बढ़ी। ब्रेंट करीब 109 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया।
कच्चे तेल में इतनी तेज बढ़ोतरी से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने और महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ा सकता है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल
अमेरिका में महंगाई और सरकारी कर्ज को लेकर चिंता के बीच 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.98 प्रतिशत पहुंच गई। यह 5 प्रतिशत के महत्वपूर्ण स्तर के बेहद करीब है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। ऐसे में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
3. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका के कारण तेल आपूर्ति और परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
यमन और लाल सागर क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों से जुड़े घटनाक्रमों ने भी तेल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर जोखिम बढ़ाया है।
आईपीओ में जा रहा पैसा भी बाजार पर डाल रहा दबाव
बाजार में गिरावट के पीछे अन्य कारण भी बताए जा रहे हैं। देश में लगातार आ रहे आईपीओ के कारण बड़ी मात्रा में निवेश राशि प्राथमिक बाजार की ओर जा रही है। इसका असर द्वितीयक बाजार में उपलब्ध तरलता पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 27 पैसे कमजोर होकर 95.79 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। अमेरिका से आए मजबूत महंगाई आंकड़ों के कारण वहां ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में चिंता बढ़ी है।
वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रही है। इन सभी कारकों के एक साथ सामने आने से शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली।



