
ISMA Statement on Sugar Price: पिछले कुछ हफ्तों से खुदरा और थोक बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों का सीजन शुरू होने से चाय से लेकर मिठाइयों तक की लागत बढ़ने के कारण आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार देश में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं है और मौजूदा तेजी अस्थायी है।
चीनी के दाम बढ़ने की क्या है वजह?
ISMA के मुताबिक हालिया तेजी के पीछे त्योहारों से अचानक बढ़ी मांग, उत्पादन में मामूली कमी, मौसम का असर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में करीब 16% की बढ़ोतरी जैसे कारण हैं।
इसके अलावा कुछ व्यापारियों द्वारा स्टॉक जमा करने से बाजार में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बनी है। ISMA ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) को चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताना सही नहीं है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन में करीब 75% हिस्सेदारी अनाज की है।
सरकार ने उठाए कड़े कदम
बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।
इसके साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट तय की गई है। GST रिकॉर्ड और वास्तविक भौतिक स्टॉक की साप्ताहिक जांच भी की जा रही है।
ISMA ने डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट को 400 टन से घटाकर 200 टन करने की सिफारिश की है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की संभावना कम हो।
आने वाले दिनों में घट सकते हैं चीनी के दाम
नई पेराई अवधि (Crushing Season) को सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी चल रही है। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई भी शुरू हो चुकी है।
आमतौर पर अक्टूबर में करीब 4 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है, लेकिन इस साल अक्टूबर 2026 में यह उत्पादन बढ़कर करीब 10 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है।
बाजार में नई चीनी की आवक बढ़ने के बाद कीमतों पर दबाव कम होने और दाम सामान्य स्तर पर लौटने की उम्मीद है। इससे त्योहारों के दौरान मिठाई, चाय और अन्य खाद्य पदार्थों की बढ़ती लागत से आम लोगों को राहत मिल सकती है।



