
Why Sugar Price Hike: भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है। हालांकि, चीनी की बढ़ती कीमतों की समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनियाभर में चीनी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है और आने वाले समय में कीमतों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है। इसके पीछे ब्राजील की बदलती एथेनॉल नीति को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कच्चे तेल की महंगाई से एथेनॉल उत्पादन पर जोर
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। वहीं, हॉरमुज संकट का समाधान नहीं होने से आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ऐसे में ब्राजील सरकार ने गन्ना किसानों को चीनी की बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।
ब्राजील ने जुलाई के अंत तक पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाकर 32% कर दी। एक महीने पहले यह 30% और एक साल पहले 27% थी। इससे गन्ने का अधिक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने की संभावना है।
ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक
अमेरिकी कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में ब्राजील की हिस्सेदारी करीब 24% है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 16% है। इसलिए ब्राजील में गन्ने के इस्तेमाल में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक चीनी बाजार पर सीधा असर डाल सकता है।
ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ने से चीनी उत्पादन में करीब 3% की कमी आने की संभावना है। ब्राजील की नेशनल सप्लाई कंपनी CONAB के अनुमान के अनुसार, इससे चीनी उत्पादन लगभग 4.3 करोड़ टन तक प्रभावित हो सकता है।
अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
एथेनॉल उत्पादन के अलावा अल नीनो की वजह से ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश में देरी तथा तापमान बढ़ने से भी गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। इससे वहां चीनी उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
ब्राजील में उत्पादन घटने का असर वैश्विक चीनी सप्लाई चेन पर पड़ने की आशंका है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से थाईलैंड और यूरोपीय संघ जैसे अन्य चीनी उत्पादक क्षेत्रों में भी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।
त्योहारों के बीच बढ़ सकती है चीनी की कीमत
भारत में त्योहारों के दौरान चीनी की मांग पहले ही बढ़ जाती है। मिठाई, पेय पदार्थ और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में इसकी खपत बढ़ने से घरेलू बाजार पर दबाव रहता है। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर भी चीनी की आपूर्ति कमजोर होती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।



