
मुंबई: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में एक और पांच साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चंद्रशेखरन ने पिछले महीने मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद संभालने की इच्छा नहीं जताई थी। बोर्ड के इस फैसले के साथ ही टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर चल रही प्रक्रिया फिलहाल टल गई है।
हालांकि, इस फैसले पर टाटा परिवार के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव का विरोध किया। रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड में मतदान के दौरान प्रस्ताव को बहुमत मिला, जबकि नोएल टाटा इसके खिलाफ थे।
अगस्त में चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने की बात कही थी
एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा पांच साल का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। उन्होंने 12 अगस्त को टाटा संस के बोर्ड को बताया था कि वह कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे।
इसके बाद नए चेयरमैन की तलाश और उत्तराधिकार प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। लेकिन 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में उन्हें एक और पांच साल के लिए बनाए रखने का फैसला किया गया।
नोएल टाटा ने क्यों किया विरोध?
टाटा संस में चेयरमैन पद और कंपनी के भविष्य के स्वरूप को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के प्रस्ताव पर भी सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी और नोएल टाटा ने उस समय प्रस्ताव का विरोध किया था। अब नए घटनाक्रम में भी नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया है।
RBI के फैसले से बदला टाटा संस का समीकरण
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब टाटा संस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियामकीय दबाव के कारण बड़ा बदलाव सामने आया है।
RBI ने 11 सितंबर 2026 को टाटा संस की अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में पंजीकरण स्वेच्छा से वापस करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने कंपनी को अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा है।
टाटा संस को सितंबर 2022 में RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी ढांचे में शामिल किया गया था। इस श्रेणी के तहत कंपनी के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता सामने आई थी। इसकी मूल तीन साल की सूचीबद्धता समयसीमा सितंबर 2025 में समाप्त हो चुकी थी, लेकिन कंपनी की पंजीकरण समाप्त करने की अर्जी लंबित रहने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा था।
टाटा संस की लिस्टिंग प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी
17 सितंबर की बोर्ड बैठक में केवल चंद्रशेखरन के कार्यकाल का फैसला नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी की आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में आवश्यक मंजूरी की जरूरत होगी। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए AGM में ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
टाटा ट्रस्ट्स और SP ग्रुप के रुख अलग
टाटा संस की संभावित लिस्टिंग लंबे समय से कंपनी के भीतर मतभेद का एक प्रमुख मुद्दा रही है।
टाटा ट्रस्ट्स के पास करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पालोनजी समूह के पास करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिपोर्टों के अनुसार, लिस्टिंग के मुद्दे पर दोनों पक्षों का रुख अलग रहा है। नोएल टाटा सार्वजनिक सूचीबद्धता के विरोध में रहे हैं, जबकि शापूरजी पालोनजी समूह लिस्टिंग के पक्ष में है।
AGM में अब असली परीक्षा
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर बोर्ड का फैसला अंतिम रूप से प्रभावी होने से पहले शेयरधारकों की मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी तरह टाटा संस की लिस्टिंग से जुड़े फैसले को भी AGM में अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
पहले 18 अगस्त को निर्धारित AGM कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। टाटा संस के Articles of Association के तहत कुछ ट्रस्टों की संयुक्त प्रतिनिधित्व व्यवस्था कोरम के लिए महत्वपूर्ण है। इस वजह से आगामी AGM भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
2017 से टाटा संस की कमान संभाल रहे हैं चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में पहली बार टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इसके बाद 2022 में उन्हें दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल मिला। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद उन्हें तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है, जिससे उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ सकता है।



