H-1B वीजा पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, 1 लाख डॉलर की शर्त एक साल और बढ़ी

US H-1B Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B वीजा को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया है। 18 सितंबर 2026 को जारी नई राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत H-1B वीजा पर लगाई गई 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह प्रतिबंध अब सितंबर 2027 तक जारी रहेगा।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 1 लाख डॉलर की राशि हर H-1B वीजा धारक या हर नवीनीकरण पर सामान्य शुल्क के रूप में लागू नहीं है। मौजूदा आदेश मुख्य रूप से अमेरिका से बाहर मौजूद उन H-1B आवेदकों पर केंद्रित है, जिनके प्रवेश के लिए संबंधित नियोक्ता को यह भुगतान करना होगा। कुछ श्रेणियों को इससे छूट भी दी जा सकती है।

H-1B नियमों पर निगरानी भी बढ़ेगी

इसी दिन ट्रंप प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम की निगरानी और कड़ी करने के लिए एक अलग कार्यकारी आदेश भी जारी किया। इसमें संबंधित एजेंसियों को H-1B आवेदनों की जांच करते समय कंपनियों की हालिया या प्रस्तावित छंटनी, वेतन और रोजगार की परिस्थितियों जैसी जानकारियों पर अधिक ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कुछ नियोक्ता, विशेष रूप से आईटी स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियां, H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए करती हैं। यह प्रशासन का दावा है; उद्योग जगत और अन्य पक्ष इस नीति के प्रभावों को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।

H-1B वीजा क्या है?

H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी कार्य वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। इसका इस्तेमाल तकनीक, इंजीनियरिंग, शोध और अन्य विशेष क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है।

भारत के लिए H-1B कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अमेरिकी तकनीकी और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में इस वीजा व्यवस्था के माध्यम से काम करते हैं।

1 लाख डॉलर की शर्त को लेकर कानूनी लड़ाई जारी

H-1B पर 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त को लेकर अमेरिका में कानूनी विवाद भी चल रहा है। एक संघीय अदालत ने पहले इस शुल्क को गैरकानूनी ठहराया था और मामला अपीलीय अदालतों में जारी है। ऐसे में प्रशासन द्वारा इसे अगले एक साल के लिए बढ़ाए जाने के बावजूद इसकी कानूनी स्थिति पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने स्थायी रूप से 1,03,265 डॉलर के शुल्क का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया है। यह प्रस्ताव मौजूदा 1 लाख डॉलर की अस्थायी व्यवस्था से अलग नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है।

भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ सकता है?

नई व्यवस्था से अमेरिका के बाहर से नए H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इससे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिकी कंपनियों में नई H-1B नौकरियों के अवसरों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इसका असर सभी भारतीय H-1B कर्मचारियों पर समान रूप से नहीं पड़ेगा। मौजूदा H-1B धारकों के नवीनीकरण और कुछ अन्य परिस्थितियों के लिए अलग नियम और अपवाद लागू हैं। इसलिए इसे सभी भारतीय H-1B कर्मचारियों की नौकरियों पर सीधे लागू होने वाला प्रतिबंध मानना सही नहीं होगा।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य कम वेतन वाले और कम कौशल वाले H-1B भर्ती पर रोक लगाना तथा उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देना है। दूसरी ओर, कारोबारी समूहों का तर्क है कि अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की जरूरत है और H-1B कार्यक्रम कंपनियों को आवश्यक प्रतिभा उपलब्ध कराने में मदद करता है।