
Houthi Movement: यमन में हूती आंदोलन के समर्थन में एक बड़े कबीलाई समूह की लामबंदी ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। राजधानी सना के पूर्वी पहाड़ी इलाकों से हथियारबंद लड़ाकों का एक बड़ा काफिला मारीब की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इन लड़ाकों के पास रॉकेट-चालित ग्रेनेड और एके-47 जैसे हथियार नजर आ रहे हैं। काफिले में युवा लड़ाकों के साथ कम उम्र के लोग भी दिखाई दे रहे हैं।
यमन के इस इलाके में आज भी पारंपरिक युद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। लड़ाके पारंपरिक पोशाक पहनकर और चप्पल में नजर आते हैं, जबकि घोड़ों की जगह अब पिकअप ट्रक युद्धक गतिविधियों का प्रमुख साधन बन चुके हैं। इस बीच बनी हशीश कबीले की लामबंदी ने सऊदी अरब और हूती विरोधी पक्ष की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
कौन है बनी हशीश कबीला?
बनी हशीश यमन का एक पुराना और प्रभावशाली कबीलाई समूह है। इसका प्रभाव क्षेत्र राजधानी सना के पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है। सना के बेहद करीब होने के कारण इस कबीले का रणनीतिक महत्व काफी अधिक माना जाता है।
2000 के दशक में बनी हशीश के कुछ हिस्सों और हूती आंदोलन के बीच संघर्ष भी हुआ था। हालांकि, 2014 में हूती विद्रोहियों के सना पर नियंत्रण के बाद दोनों पक्षों के समीकरण बदल गए। इसके बाद कबीले के कुछ हिस्सों का हूती नेटवर्क के साथ सहयोग बढ़ा।
अब बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाकों का हूती ढांचे के साथ खड़ा होना राजधानी के आसपास हूती प्रभाव मजबूत होने का संकेत माना जा रहा है।
मारीब की ओर क्यों बढ़ रहा है काफिला?
यमन का मारीब उत्तर-मध्य क्षेत्र में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक इलाका है। यह सना से लगभग 175 किलोमीटर पूर्व में है और राजधानी को देश के पूर्वी हिस्सों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्र में आता है।
मारीब की अहमियत केवल उसके भौगोलिक स्थान की वजह से नहीं है। यहां तेल और गैस के महत्वपूर्ण संसाधन भी मौजूद हैं। 1980 के दशक में इस क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक तेल भंडार मिलने के बाद इसका आर्थिक और रणनीतिक महत्व और बढ़ गया।
लंबे समय से मारीब हूती विरोधी यमनी सरकार और स्थानीय कबीलाई ताकतों का महत्वपूर्ण गढ़ रहा है। हूती संगठन के लिए मारीब पर नियंत्रण का मतलब सना के पूर्वी हिस्से में अपनी पकड़ मजबूत करना और महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना हो सकता है।
सऊदी अरब के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?
मारीब फिलहाल हूती विरोधी यमनी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र है और इसमें सऊदी समर्थित सरकारी बलों की मौजूदगी है। यह क्षेत्र सना और सऊदी सीमा के बीच महत्वपूर्ण गलियारे में भी आता है।
यदि हूती मारीब पर अपना नियंत्रण मजबूत करने में सफल होते हैं, तो इससे उन्हें पूर्वी यमन में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। साथ ही ऊर्जा संसाधनों और महत्वपूर्ण मार्गों पर प्रभाव बढ़ने से हूतियों की सैन्य क्षमता को भी फायदा हो सकता है।
सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि मारीब में हूती प्रभाव बढ़ने से उसकी दक्षिणी सीमा की सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा ड्रोन और मिसाइल हमलों के लिए हूतियों की परिचालन क्षमता और क्षेत्र भी बढ़ सकता है।
हालांकि, बनी हशीश के काफिले की मारीब की ओर बढ़ने की खबरों को लेकर उपलब्ध जानकारी से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मारीब पर तत्काल बड़े सैन्य हमले की तैयारी हो रही है। स्थिति तेजी से बदल रही है और आगे की सैन्य गतिविधियों पर नजर बनी हुई है।



