
Supreme Court Strict On Airlines Festive Fare: त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकट के किराए में अचानक और मनमानी बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानें तक रोकने पर विचार किया जाना चाहिए।
त्योहारों के दौरान हवाई किराए में बढ़ोतरी के खिलाफ दायर याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उनके अनुपालन और नियमन की मौजूदा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
हवाई किराए से जुड़े नियम अंतिम चरण में
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवाई किराए और अन्य शुल्कों से संबंधित नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इसे पूरा करने में करीब 3 सप्ताह का समय लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता ने एयरलाइंस पर मनमानी का आरोप लगाया
याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि निजी एयरलाइंस मनमाने तरीके से हवाई किराए तय करती हैं और यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क भी वसूलती हैं।
उन्होंने हवाई किराए को लेकर स्पष्ट नियम बनाने और उनके पालन की निगरानी के लिए एक नियामक संस्था (Regulatory Body) गठित करने की मांग की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने संसद में कहा है कि सरकार किराए पर कोई सीमा (Fare Cap) नहीं लगा सकती।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है नाराजगी
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए को लेकर चिंता व्यक्त की थी। कोर्ट ने कहा था कि एयरलाइंस द्वारा मनमाने तरीके से किराए तय करना यात्रियों के शोषण के समान हो सकता है और सरकार को यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। इस दौरान हवाई किराए और शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।



