
Ahmedabad Cyber Crime Busts International Boss Scam Linked to China and Pakistan: भारत की विभिन्न कंपनियों और कारोबारी फर्मों के ई-मेल पर मालवेयर वायरस भेजकर कंप्यूटर सिस्टम और व्हाट्सऐप का एक्सेस हासिल करने वाले साइबर ‘बॉस स्कैम’ का अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों की पूछताछ में सामने आया कि साइबर अपराधी कंपनी के मालिक या बॉस की फोटो को व्हाट्सऐप डीपी के रूप में लगाकर कर्मचारियों को उनके नाम से मैसेज भेजते थे और तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते थे। जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार चीन और पाकिस्तान तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
चीन से मालवेयर अटैक, पाकिस्तान से चलता था कॉल सेंटर
पुलिस कमिश्नर अनुपमसिंह गेहलोत के अनुसार, आरोपी देशभर में चल रहे साइबर बॉस स्कैम के कई मामलों में शामिल थे। चाइनीज गैंग विभिन्न कंपनियों और कारोबारी संस्थानों के ई-मेल पर मालवेयर वायरस वाली ZIP फाइल भेजती थी।
फाइल डाउनलोड होते ही संबंधित कंप्यूटर का एक्सेस साइबर अपराधियों के पास पहुंच जाता था। इसके बाद कंप्यूटर में मौजूद व्हाट्सऐप एक्सेस और कंपनी के मालिक की डीपी का इस्तेमाल करके अकाउंटेंट या अन्य कर्मचारियों को मैसेज भेजे जाते थे।
मैसेज में कंपनी के बॉस के नाम पर किसी क्लाइंट को तत्काल बड़ी रकम ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाता था। इस तरीके से देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अन्य साइबर अपराधी गिरोहों को OTP और सिम कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 22 हजार OTP की सर्विस उपलब्ध कराई थी, जिसके बदले उन्हें प्रत्येक OTP पर लगभग ₹100 कमीशन मिलता था। इसके अलावा उन्होंने 4,500 से अधिक सिम कार्ड भी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे।
पुलिस जांच के अनुसार, भारत में होने वाले साइबर बॉस स्कैम में मालवेयर वायरस चाइनीज गैंग की ओर से भेजे जाते थे, जबकि पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित कॉल सेंटर से साइबर ठगी का संचालन किया जाता था।
देश के करीब 10 हजार डिवाइस से कनेक्शन
साइबर क्राइम सेल की जांच में पता चला कि आरोपी चाइनीज गैंग के साथ मिलकर देशभर के मोबाइल फोन और कंप्यूटरों में मालवेयर भेज रहे थे।
तकनीकी विश्लेषण के दौरान सामने आया कि उनके द्वारा भेजे गए वायरस करीब 10 हजार डिवाइस में सक्रिय थे। पुलिस ने केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर इनमें से बड़ी संख्या में डिवाइस को मालवेयर से मुक्त कराया, जिससे संभावित करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को रोका जा सका।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
पुलिस ने लोगों और कंपनियों को साइबर फ्रॉड से बचने के लिए कई सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- अनजान मोबाइल नंबर या ई-मेल से आने वाली ZIP, EXE या APK फाइल डाउनलोड न करें।
- व्हाट्सऐप या ई-मेल पर पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश मिलने पर पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे फोन करके पुष्टि करें।
- कंपनी में बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन के लिए दूसरे स्तर की वेरिफिकेशन प्रक्रिया जरूर रखें।
- मालवेयर का पता लगाने वाले भरोसेमंद एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
- किसी भी संदिग्ध लिंक या अटैचमेंट को खोलने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें।
आरोपियों की क्या भूमिका थी?
इंजामुल: उसने बीए तक पढ़ाई की थी और साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले डमी सिम कार्ड तथा व्हाट्सऐप आधारित सर्विस से जुड़ा था। वह डमी सिम कार्ड एक्टिव करने के लिए OTP उपलब्ध कराता था।
इमरान अली प्यादा: वह विभिन्न मोबाइल कंपनियों के लिए सिम कार्ड बिक्री का काम करता था। पुलिस के अनुसार, वह ग्राहकों के डेटा और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवाता था।
बॉस की डीपी लगाकर डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अहमदाबाद की एक कंपनी के अकाउंटेंट को कंपनी के मालिक की फोटो लगी व्हाट्सऐप प्रोफाइल से मैसेज मिला।
मैसेज में कथित ‘बॉस’ ने बताया कि वह एक मीटिंग में है और तत्काल एक क्लाइंट को ₹1.5 करोड़ ट्रांसफर करने हैं। व्हाट्सऐप पर बॉस की फोटो देखकर अकाउंटेंट ने भरोसा किया और निर्देश के अनुसार डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ समय बाद जब अकाउंटेंट ने वास्तविक कंपनी मालिक से बात की, तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश दिया ही नहीं था। इसके बाद साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ और मामले की शिकायत अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल में दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच शुरू की और इसी जांच के दौरान पूरे साइबर नेटवर्क का खुलासा हुआ।



