समृद्ध गुजरात में गरीबी छिपाने की ‘खेल’? 33,000 अंत्योदय कार्ड रद्द, 7 लाख से अधिक परिवारों पर संकट

Gujarat Antyodaya Ration Card: गुजरात सरकार की ओर से राज्य को समृद्ध और विकसित बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्य के अन्न एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कुल 33,000 अंत्योदय राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। वहीं, राज्य में आज भी 7 लाख से अधिक परिवार दो वक्त का भोजन जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मुफ्त अनाज के लिए राशन की दुकानों पर कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।

5 साल में 33,000 गरीब परिवारों को अनाज से वंचित किए जाने का दावा

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में गुजरात में 8.10 लाख अंत्योदय कार्ड धारक थे। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 7.77 लाख रह गई। इस तरह पांच वर्षों में करीब 33,000 अंत्योदय कार्ड कम हुए हैं।

इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या राज्य में वास्तव में गरीबी कम हुई है या फिर सरकारी रिकॉर्ड में गरीब परिवारों की संख्या घट रही है। आलोचकों का आरोप है कि कार्डों की संख्या कम करके सरकार अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन कर रही है, जबकि जरूरतमंद परिवारों की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

किन परिवारों को मिलता है अंत्योदय कार्ड?

अंत्योदय अन्न योजना (AAY) का उद्देश्य समाज के सबसे गरीब और वंचित परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लाभार्थियों में बेहद गरीब परिवार, ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारीगर, दिहाड़ी मजदूर, भूमिहीन कृषि मजदूर, निराश्रित, विधवा और परित्यक्ता महिलाएं जैसे कमजोर वर्ग शामिल हो सकते हैं।

ऐसे परिवारों के लिए राशन कार्ड खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसलिए पात्र परिवारों के कार्ड रद्द होने की स्थिति में उनके सामने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।

केंद्र के आंकड़ों में बड़े परिवारों की स्थिति

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में बड़ी संख्या में परिवार अंत्योदय कार्ड के जरिए मुफ्त खाद्यान्न योजना का लाभ लेते रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक 31.89 लाख परिवारों ने अंत्योदय कार्ड के आधार पर हर महीने 45 किलो मुफ्त अनाज प्राप्त किया है।

इसके अलावा, गुजरात में 3.52 लाख ऐसे गरीब परिवार बताए गए हैं, जिनमें सदस्यों की संख्या पांच या उससे अधिक है। ऐसे बड़े परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा और बढ़ती आर्थिक चुनौतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।

पहले मुफ्त अनाज बांटकर मिली वाहवाही, अब कार्ड रद्द करने पर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, पहले 37.61 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया गया था। इसके लिए सरकार को प्रशंसा भी मिली थी। लेकिन अब अंत्योदय कार्डों की संख्या में कमी आने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार की ओर से कार्ड रद्द किए जाने के पीछे पात्रता, सत्यापन या अन्य प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। हालांकि, गरीब परिवारों का आरोप है कि यदि वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों के राशन कार्ड रद्द होते हैं, तो इससे उनकी खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में मांग उठ रही है कि सरकार केवल अंत्योदय कार्डों की संख्या कम होने के आंकड़े पेश करने के बजाय यह भी स्पष्ट करे कि कितने कार्ड किस कारण से रद्द किए गए और इनमें से कितने परिवार अभी भी खाद्य सहायता के पात्र हैं।