
Saurashtra Rain Deficit: जुलाई में अच्छी बारिश के बाद अगस्त में मानसून के कमजोर पड़ने से सौराष्ट्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के दूसरे दौर का लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों के सामने अब फसलों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अगले एक सप्ताह तक भी अच्छी बारिश के आसार नहीं होने से मूंगफली, कपास और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों पर संकट गहराने की आशंका है।
बारिश नहीं हुई तो सूख सकती हैं फसलें
जूनागढ़ जिले के अजाब और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खेतों में मूंगफली की फसल फिलहाल हरी-भरी नजर आ रही है, लेकिन इसे बचाने के लिए किसान लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं। करीब एक महीने से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान कुओं और बोरवेल के पानी से सिंचाई कर फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
लगातार सिंचाई के चलते अब कई इलाकों में कुओं का जलस्तर तेजी से नीचे चला गया है और कुओं के तल दिखाई देने लगे हैं। भूजल स्तर नीचे जाने से आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
बारिश के साथ बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी
किसानों के लिए समस्या सिर्फ बारिश की कमी तक सीमित नहीं है। फसलों को सिंचाई की सबसे ज्यादा जरूरत के समय ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या भी परेशानी बढ़ा रही है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, कम वोल्टेज के कारण पानी की मोटरें ठीक से नहीं चल पा रही हैं और कई मामलों में मोटर जलने की समस्या भी सामने आ रही है। ऐसे में एक तरफ बारिश का इंतजार है, तो दूसरी तरफ बिजली व्यवस्था की दिक्कतों के कारण किसान अपनी फसल को पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं।
किसानों को अब मानसून के अगले दौर का इंतजार
सौराष्ट्र में मूंगफली और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के लिए इस समय पर्याप्त नमी बेहद जरूरी है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है।
बारिश की कमी, गिरता भूजल स्तर, बिजली कटौती और लो-वोल्टेज—इन सभी समस्याओं के बीच सौराष्ट्र के किसान अब मानसून के अगले दौर की बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।



