
Gujarat Tobacco Ban: गुजरात में गुटखा, तंबाकू और निकोटिनयुक्त पान मसाले पर प्रतिबंध को लगातार 14वें साल भी बढ़ा दिया गया है। नियमों के तहत ऐसे उत्पादों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर रोक है। इसके बावजूद राज्य में इनकी खपत और बिक्री पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 38.40% पुरुष और 7% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं।
प्रतिबंध के बावजूद हजारों करोड़ का कारोबार
वर्ष 2023-24 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े गुजरात में तंबाकू सेवन की गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। राज्य में 15 वर्ष से अधिक उम्र के 38.40% पुरुष और 7% महिलाएं किसी न किसी प्रकार के तंबाकू का इस्तेमाल करती हैं।
हालांकि, यह आंकड़ा सिर्फ गुटखा खाने वालों का नहीं है। इसमें सिगरेट, बीड़ी, खैनी, मावा, चबाने वाला तंबाकू, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद शामिल हो सकते हैं।
राज्य में तंबाकू और पान मसाला उत्पादों का कारोबार हजारों करोड़ रुपये का बताया जाता है। यानी एक तरफ सरकार प्रतिबंध लागू कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में इन उत्पादों की उपलब्धता और खपत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सरकार खुद मानती है- गुटखा और पान मसाला कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं
गुजरात सरकार द्वारा जारी जानकारी में टाटा मेमोरियल अस्पताल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और अन्य शोधों का हवाला देते हुए कहा गया है कि गुटखा और पान मसाले का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
खास तौर पर मुंह के कैंसर का खतरा तंबाकू और निकोटिन वाले उत्पादों के सेवन से बढ़ता है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार, भारत में लगभग 35% वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि करीब 21% लोग धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं।
अलग-अलग बेचकर भी गुटखा बनाने पर रोक
सरकार का प्रतिबंध केवल तैयार गुटखा या निकोटिनयुक्त पान मसाले तक सीमित नहीं है। ऐसे अलग-अलग घटकों की बिक्री पर भी रोक है, जिन्हें मिलाकर अंतिम उत्पाद के तौर पर गुटखा या पान मसाला तैयार किया जा सकता है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद बाजार में तंबाकू और पान मसाला उत्पादों की उपलब्धता पर सवाल बने हुए हैं।
दिन में 8 से 10 बार तक तंबाकू का सेवन
एक अध्ययन में गुजरात में कुछ तंबाकू उपभोक्ताओं द्वारा दिन में 8 से 10 बार तक तंबाकू का सेवन करने की बात सामने आई थी। मावा, तंबाकू, चूना और अन्य धुआं रहित उत्पादों के लगातार इस्तेमाल को देखते हुए इनके वास्तविक बाजार का आकार काफी बड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।
सिविल कैंसर अस्पताल में मुंह और गले के कैंसर के मामले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अस्पताल में दर्ज मामलों का आंकड़ा इस प्रकार रहा:
- 2021: 4,643 मामले
- 2022: 4,532 मामले
- 2023: 4,484 मामले
- 2024: 4,648 मामले
- 2025: 4,803 मामले
2025 में मुंह और गले के कैंसर के 4,803 मामले सामने आए, जो पिछले वर्षों की तुलना में चिंता बढ़ाने वाला आंकड़ा है।
गुटखा और तंबाकू पर प्रतिबंध को लगातार बढ़ाए जाने के बावजूद इनकी खपत पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पाना गुजरात के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।



