BRICS Summit 2026: भारत की बड़ी कूटनीतिक तैयारी, पश्चिम एशिया से डॉलर तक इन मुद्दों पर रहेगी नजर

BRICS Summit 2026 India Diplomacy: भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली की सबसे बड़ी प्राथमिकता सदस्य देशों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाना और सम्मेलन के अंत में एक साझा घोषणापत्र जारी करना है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष इस कूटनीतिक प्रयास के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।

भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि उसकी अध्यक्षता में BRICS को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी मंच के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। यही वजह है कि संयुक्त बयान में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर भारत बेहद सावधानी बरत रहा है।

ईरान उठा सकता है अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का मुद्दा

BRICS बैठक में ईरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का मुद्दा प्रमुखता से उठा सकता है। ईरान अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की निंदा के लिए BRICS सदस्य देशों से समर्थन मांग सकता है।

ईरान पहले ही UAE पर अपनी जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ किए जाने का आरोप लगाता रहा है। वहीं, चीन और रूस को ईरान के करीबी देशों के रूप में देखा जाता है। ऐसे में भारत के लिए सभी सदस्य देशों को एक जैसी भाषा पर सहमत कराना आसान नहीं होगा।

सहमति नहीं बनी तो भारत जारी कर सकता है ‘चेयर समरी’

अगर पश्चिम एशिया के मुद्दे पर BRICS देशों के बीच आम सहमति नहीं बनती है, तो संयुक्त घोषणा जारी करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा भारत ‘चेयर समरी’ जारी कर सकता है।

BRICS की पिछली बैठकों में भी कुछ मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बनने पर ऐसी स्थिति देखने को मिली है। भारत नहीं चाहता कि उसकी अध्यक्षता में BRICS मंच से अमेरिका के खिलाफ सीधे तौर पर कोई निंदा प्रस्ताव सामने आए।

डॉलर से दूरी का मुद्दा भी अहम

BRICS के एजेंडे में डॉलर पर निर्भरता कम करना भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी BRICS देशों को चेतावनी दे चुके हैं कि वे अमेरिकी डॉलर की भूमिका को कमजोर करने वाली किसी पहल से दूर रहें। ऐसे में यदि इस शिखर सम्मेलन में स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देने से जुड़ा कोई बड़ा फैसला होता है, तो अमेरिका की चिंता बढ़ सकती है।

भारत के सामने सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती

BRICS Summit 2026 में भारत को एक तरफ रूस और चीन जैसे देशों के साथ सहमति बनाने की कोशिश करनी होगी, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी ध्यान में रखना होगा।

ऐसे में पश्चिम एशिया का संघर्ष, अमेरिका-ईरान तनाव, डॉलर पर निर्भरता और BRICS की भविष्य की भूमिका इस शिखर सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। भारत की कोशिश होगी कि BRICS को किसी एक देश या पश्चिमी देशों के विरोध के मंच के बजाय वैश्विक सहयोग के मंच के रूप में प्रस्तुत किया जाए।