
Donald Trump and Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह रही है। उनके इस बयान के बाद बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत $96 प्रति बैरल के पार चली गई, जबकि WTI क्रूड भी करीब $91.46 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट करते हुए उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह ईरान को बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं।
ट्रंप ने दावा किया कि मौजूदा स्थिति अमेरिका के पक्ष में है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का लगभग पूर्ण नियंत्रण है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह रही है और वहां के लोग कब उठकर विरोध करेंगे, यह देखने वाली बात है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हॉर्मुज बना सबसे बड़ा केंद्र
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। संघर्ष के कारण यहां जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक बाजार में चिंता बनी हुई है। हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका का कहना है कि उसने हॉर्मुज के आसपास ईरानी गतिविधियों और समुद्री खतरों के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं, ईरान की ओर से भी अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के दावे किए गए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ट्रंप के ताजा बयान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दिया।
- Brent Crude: $96 प्रति बैरल के पार
- WTI Crude: करीब $91.46 प्रति बैरल
तेल बाजार में लगातार तीसरे सत्र तेजी देखी गई। कारोबारियों को आशंका है कि हॉर्मुज के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है।
भारत समेत दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता
हॉर्मुज में लंबे समय तक तनाव रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर कच्चे तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल, गैस, परिवहन लागत और महंगाई तक पड़ सकता है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात पर निर्भर देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर तेज होने के बाद वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ी है। डॉलर में मजबूती और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता भी सामने आ रही है।



