550 साल पहले स्वयं प्रकट हुए राजकोट के ‘रामनाथ’ महादेव, 16 पीढ़ियों से एक ही परिवार कर रहा पूजा; जानिए इतिहास

Ramnath Mahadev: राजकोट में आजी नदी के तट पर स्थित रामनाथ महादेव मंदिर शहर के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खास बात यह है कि मंदिर में कभी ताला नहीं लगाया जाता। चारों ओर से खुले इस शिवालय में भारी बारिश के दौरान आजी नदी का पानी पहुंचकर प्राकृतिक जलाभिषेक करता है। यही वजह है कि रामनाथ महादेव मंदिर की परंपरा और प्राकृतिक स्वरूप इसे अन्य शिवालयों से अलग बनाते हैं।

550 साल पुरानी है रामनाथ महादेव की मान्यता

लोकमान्यता के अनुसार, करीब 550 वर्ष पहले यहां भगवान शिव स्वयंभू महादेव के रूप में प्रकट हुए थे। यह मंदिर राजकोट शहर के बसने से भी पहले आजी नदी के किनारे मौजूद था। इसी वजह से इसे पुराने समय के ग्रामीण क्षेत्र के मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।

आजी नदी के दोनों किनारों के प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की श्रद्धा का केंद्र रहा है। बारिश के मौसम में जब आजी नदी में बाढ़ आती है, तो कई बार मंदिर परिसर पानी में डूब जाता है। ऐसे समय में जहां श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं, वहीं नदी का पानी भी शिवलिंग का प्राकृतिक अभिषेक कर देता है।

सातम-आठम पर लगता है पारंपरिक मेला

पुराने राजकोट का रामनाथपरा इलाका शहर के सबसे पुराने क्षेत्रों में गिना जाता है और इसे ‘छोटीकाशी’ के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और मन्नतें मानते हैं।

बारिश के दौरान जब रामनाथ महादेव का मुख्य मंदिर पानी में डूब जाता है, तब श्रद्धालु पास स्थित उपमंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। यहां वर्षों से सातम-आठम के अवसर पर पारंपरिक मेले का आयोजन होता आ रहा है। पुराने राजकोट के लोगों के लिए इस मेले का विशेष महत्व रहा है और आज भी यह परंपरा कायम है।

मंदिर में कभी नहीं लगाया जाता ताला

रामनाथ महादेव मंदिर शिखरबद्ध है, लेकिन इसकी संरचना चारों ओर से खुली हुई है। मंदिर की एक खास परंपरा यह भी है कि यहां कभी ताला नहीं लगाया जाता।

लोकवायका के अनुसार, स्वयंभू रूप में प्रकट होने के बाद महादेव करीब 100 वर्षों तक बिना पूजा-अर्चना के रहे। इसके बाद कच्छ के नारायण सरोवर-कोटेश्वर क्षेत्र से यहां आकर बसे गोस्वामी परिवार ने भगवान शिव की पूजा शुरू की।

कहा जाता है कि तब से लेकर आज तक गोस्वामी परिवार की 16 पीढ़ियां वंश परंपरा के अनुसार रामनाथ महादेव की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

प्राचीन आस्था के साथ आधुनिक और मजबूत डिजाइन

मंदिर के विकास और पुनर्निर्माण में स्वयंभू शिवलिंग की पवित्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। शिवलिंग को सीधे स्पर्श किए बिना मंदिर की अन्य सुविधाओं और संरचना को विकसित करने की योजना बनाई गई है।

आजी नदी में आने वाली बाढ़ और बारिश जैसी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मंदिर की डिजाइन तैयार की गई है। इसमें कुंड कॉन्सेप्ट के साथ पारंपरिक स्थापत्य और आधुनिक मजबूती का संयोजन किया गया है। मंदिर के शिखर और अन्य हिस्सों की डिजाइन में वास्तु एवं शिल्प संबंधी पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है।

रामनाथ महादेव के आसपास 100 से अधिक प्राचीन मंदिर

रामनाथ महादेव मंदिर के आसपास भी कई धार्मिक और ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं। इनमें बहुचराजी मंदिर, नागनाथ, सुखनाथ, गोपनाथ, जागनाथ, पंचनाथ, बाला हनुमान, गायत्री मंदिर और वाघेश्वरी शीतला माता मंदिर प्रमुख हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, आसपास के 100 से अधिक मंदिरों में कई मंदिर 125 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। इस वजह से रामनाथपरा और इसके आसपास का क्षेत्र राजकोट की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।