
Indian Stock Market Crash: पश्चिम एशिया में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक बयानों का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे चला गया, जबकि निफ्टी भी 250 अंक से अधिक फिसल गया।
बाजार में अचानक आई बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट देखने को मिली और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत
बुधवार का कारोबारी सत्र भारतीय निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा।
BSE सेंसेक्स: पिछले बंद स्तर 76,944 के मुकाबले 76,471 पर खुला। इसके बाद बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स 700 अंक से अधिक गिरकर 76,135 के स्तर तक पहुंच गया।
NSE निफ्टी: पिछली क्लोजिंग 24,055 के मुकाबले 23,858 पर खुलने के बाद और नीचे फिसलकर 23,786 के स्तर तक पहुंच गया।
इस गिरावट से बाजार में निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई।
लार्जकैप से स्मॉलकैप तक बिकवाली
बाजार में दबाव का असर केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा। लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप—तीनों सेगमेंट में कई शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
लार्जकैप शेयर
- IndiGo: करीब 2.70% नीचे
- Eternal: करीब 1.90% नीचे
मिडकैप शेयर
- GVT&D: 3.10% नीचे
- Godrej Properties: 3%
- MFSL: 2.90%
- TI India: 2.50%
- Voltas: 2.20%
स्मॉलकैप शेयर
- KFIN Technologies: 3.45%
- Brigade Enterprises: 3%
- Cholamandalam Financial Holdings: 2.50%
ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ी बाजार की चिंता?
बाजार में गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका का लगभग पूर्ण नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई की खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। बाजार को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर कच्चे तेल की आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।
क्रूड ऑयल के दाम बढ़े, एशियाई बाजार भी दबाव में
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल, WTI क्रूड करीब 92 डॉलर और मर्बन क्रूड 104 डॉलर के पार पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि महंगा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
एशियाई बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला। जापान का निक्केई करीब 1,800 अंक, हांगकांग का हैंग सेंग करीब 300 अंक और दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 4% तक गिर गया।



