
Modi Cabinet Expansion 2026: भाजपा संगठन में नई टीम के गठन के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार में बड़े स्तर पर बदलाव किया जा सकता है।
सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चाओं के मुताबिक, संभावित फेरबदल में 16 से 17 नए और युवा चेहरों को केंद्र में मंत्री पद मिल सकता है। वहीं, जिन वरिष्ठ मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है, उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इन बदलावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है प्रमोशन?
संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। फिलहाल उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं।
अटकलों के मुताबिक, उनके कामकाज और प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों की शीर्ष टीम में और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव की चर्चा
वहीं, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के विभाग में भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। E20 ईंधन समेत कुछ मुद्दों को लेकर हुई चर्चाओं के बीच उनके मंत्रालय का दायरा कम कर कोई नया विभाग सौंपे जाने की संभावना की बात कही जा रही है।
हालांकि, यह फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों तक सीमित है। गडकरी के मंत्रालय में बदलाव को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संभावित फेरबदल में कुछ ऐसे वरिष्ठ मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी बदली जा सकती हैं, जिनके नाम को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं।
14 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फिलहाल कई मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय या अतिरिक्त प्रभार हैं। बताया जा रहा है कि 14 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का भी जिक्र किया जा रहा है। शिक्षा जैसे बड़े मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसी मंत्री के मौजूदा कामकाज पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केंद्र में प्रधानमंत्री समेत मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 फीसदी तक हो सकती है। 543 सदस्यीय लोकसभा के आधार पर यह अधिकतम 81 सदस्य बनती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य होने की स्थिति में अधिकतम संख्या तक पहुंचने के लिए जगह मौजूद है।
चुनावी समीकरणों पर भी रहेगा फोकस
संभावित फेरबदल में केवल प्रशासनिक प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को भी महत्व दिए जाने की चर्चा है।
2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों और विभिन्न सामाजिक समूहों को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
महिलाओं, युवाओं और नए चेहरों को अधिक जगह देने की संभावना भी जताई जा रही है। इससे भाजपा के संगठन और सरकार दोनों में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा सकता है।
विपक्ष की भी टिकी नजर
संभावित कैबिनेट विस्तार पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की भी नजर है। विपक्ष यह देखना चाहेगा कि मोदी सरकार किन राज्यों और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देती है और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है।
फिलहाल कैबिनेट फेरबदल को लेकर 16-17 नए चेहरों, अश्विनी वैष्णव के संभावित प्रमोशन और नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव जैसी चर्चाएं राजनीतिक हलकों में हैं, लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।



