प्रसिद्ध संगीतकार गौरांग व्यास का अहमदाबाद में निधन, 87 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Gaurang Vyas Died: गुजराती संगीत जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध संगीतकार गौरांग व्यास का अहमदाबाद में निधन हो गया। उन्होंने देर रात अंतिम सांस ली। उनके निधन से गुजराती फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। गौरांग व्यास ने अपने लंबे करियर में 100 से अधिक गुजराती फिल्मों को संगीत दिया और गुजराती संगीत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

संगीत की विरासत परिवार से मिली

गौरांग व्यास को संगीत का संस्कार विरासत में मिला था। उनके पिता और प्रसिद्ध संगीतकार अविनाश व्यास थे। इसी पारिवारिक संगीत विरासत को आगे बढ़ाते हुए गौरांग व्यास ने लोकसंगीत, भजन, रास-गरबा और गुजराती सुगम संगीत सहित कई क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने 500 से अधिक गुजराती गीतकारों, कवियों और गजलकारों की रचनाओं को संगीतबद्ध किया था। उनकी संगीत शैली में गुजराती लोक परंपरा और शास्त्रीय संगीत की गहरी छाप देखने को मिलती थी।

‘लव नी भवई’ का संगीत आज भी यादगार

गौरांग व्यास के संगीत से जुड़े कई एल्बम बेहद लोकप्रिय रहे। इनमें ‘भजन अनमोल’, ‘जलारामनी झूंपड़ी’, ‘गंगासतीना भजनों’, ‘कहत कबीर’, ‘नॉन स्टॉप डांडिया रास’ और ‘प्राचीन प्रभातिया’ जैसे एल्बम शामिल हैं।

गुजराती फिल्म ‘लव नी भवई’ में भी उनका संगीत खास तौर पर याद किया जाता है। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘आज वगडावो रूडा शरणाई…’ और ‘मने एकली मेलिने’ जैसी रचनाएं शामिल हैं, जिन्हें संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा।

GIFA के गोल्डन अवॉर्ड से हुए थे सम्मानित

गौरांग व्यास का जन्म 24 नवंबर 1938 को हुआ था। गुजराती फिल्म और संगीत जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें GIFA की ओर से गोल्डन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

करीब छह दशक तक संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहे गौरांग व्यास का निधन गुजराती संगीत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी रचनाएं और संगीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गुजराती संगीत की समृद्ध विरासत का हिस्सा बने रहेंगे।