
रसायनों की बढ़ती कीमतें, शिपिंग में देरी और मांग-आपूर्ति के बीच असंतुलन से पटाखों के दाम में बड़ा उछाल आने का अनुमान
अहमदाबाद: इस दिवाली आसमान को रोशनी से जगमगाना लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। विभिन्न श्रेणियों के पटाखों की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की आशंका है। पटाखा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव के कारण रसायनों की कीमतों में वृद्धि, शिपिंग में देरी और तमिलनाडु के शिवकाशी में मांग तथा आपूर्ति के बीच पैदा हुए असंतुलन के चलते इस साल पटाखे महंगे हो सकते हैं।
भारत की पटाखा राजधानी कहे जाने वाले शिवकाशी का देश के कुल पटाखा उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत योगदान है। यहां करीब 1,070 लाइसेंस प्राप्त उत्पादन इकाइयां हैं, जिनका वार्षिक कारोबार लगभग 7,000 करोड़ रुपये बताया जाता है। ऐसे में शिवकाशी के पटाखा उद्योग की परिस्थितियों का असर देशभर के बाजारों पर पड़ सकता है।
कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से पटाखे होंगे महंगे
इंडियन फायरवर्क्स एसोसिएशन के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पटाखों के दाम बढ़ रहे हैं। उत्पादों की श्रेणी के आधार पर कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।
केवल कच्चा माल ही नहीं, बल्कि पटाखों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्रियों की लागत भी बढ़ी है। इनमें कागज, डुप्लेक्स बोर्ड, धागा, लेबल और कई दूसरी आवश्यक सामग्री शामिल हैं।
उत्पादन लागत में लगातार हो रही वृद्धि का असर तैयार पटाखों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। इससे दिवाली पर पटाखे खरीदने वाले ग्राहकों को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
उत्पादन इकाइयां बंद होने से बढ़ी मांग, छूट मिलने की उम्मीद कम
इस साल कुछ पटाखा उत्पादन इकाइयों के बंद होने के कारण बाजार में मांग का दबाव भी बढ़ा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मांग बढ़ने और लागत में इजाफा होने के चलते निर्माता ग्राहकों को पहले की तरह छूट देने के लिए तैयार नहीं हैं।
आमतौर पर दिवाली के दौरान पटाखों की बिक्री में तेजी आती है। लेकिन इस बार बढ़ती उत्पादन लागत और मांग-आपूर्ति के बीच असंतुलन के कारण ग्राहकों को कम छूट मिलने की संभावना है।
इसका असर खुदरा बाजार में पटाखों की खरीदारी पर पड़ सकता है। यदि कीमतों में अनुमान के मुताबिक बढ़ोतरी होती है, तो परिवारों को दिवाली के बजट में पटाखों के लिए अधिक राशि रखनी पड़ सकती है।
कुछ राज्यों में प्रतिबंधों में राहत से बिक्री को मिल सकता है बढ़ावा
शिवकाशी फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, कुछ राज्य सरकारों ने पटाखों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंधों में छूट दी है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के रुख को भी इस साल पटाखों की बिक्री के लिए सकारात्मक बताया जा रहा है।
हालांकि, दूसरी ओर कच्चे माल की कीमतों में असामान्य वृद्धि ने निर्माताओं की लागत बढ़ा दी है। इस तरह बाजार में बिक्री बढ़ने की संभावना के साथ उत्पादन खर्च का दबाव भी बना हुआ है।
उद्योग के सामने चुनौती यह है कि बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ लागत और मुनाफे के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
सल्फर की कीमत 75 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंची
पटाखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल सल्फर की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी कीमत पहले लगभग 75 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो बढ़कर 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। बाद में इसकी कीमत घटकर लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
इसके अलावा, एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और शोरा की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, कच्चे माल की लागत में औसतन लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ईंधन की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत भी ऊंची बनी हुई है। कच्चे माल और परिवहन पर अधिक खर्च होने के कारण निर्माताओं के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है। इसका असर अंततः तैयार पटाखों की कीमतों पर पड़ सकता है।
दिवाली के लिए करीब 60% उत्पादन पूरा
पटाखा निर्माताओं के अनुसार, इस सीजन में भारी मांग को पूरा करने के लिए निर्धारित उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है।
अब बाजार की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि शेष उत्पादन समय पर पूरा होता है या नहीं और कच्चे माल तथा परिवहन की लागत में आगे कितना बदलाव आता है।
कुल मिलाकर, इस दिवाली पटाखों की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक कीमतों में बदलाव पटाखों की श्रेणी, उत्पादन लागत और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।



