
Ahmedabad News: अहमदाबाद के एक पॉश इलाके में रहने वाले डॉक्टर परिवार में आधी रात को ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि मामला संभालने के लिए 181 अभयम महिला हेल्पलाइन की मदद लेनी पड़ी। परिवार को पता चला कि 17 वर्षीय किशोरी सोशल मीडिया के जरिए करीब 12 अलग-अलग युवकों के संपर्क में थी। ऑनलाइन बातचीत के दौरान उसने अपनी निजी तस्वीरें भी साझा की थीं। मामला सामने आने के बाद घर में तनाव बढ़ गया और माता-पिता व बेटी के बीच विवाद की स्थिति बन गई।
बेटी के व्यवहार में बदलाव से पिता को हुआ शक
परिवार के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह से किशोरी के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा था। पहले परिवार के साथ घुल-मिलकर रहने वाली बेटी धीरे-धीरे घरवालों से दूरी बनाने लगी थी और लंबे समय तक अपने कमरे में अकेली रहती थी।
वह अक्सर कमरे का दरवाजा बंद रखती थी और मोबाइल पर काफी समय बिताती थी। किशोरी के व्यवहार में आए बदलाव और लगातार अकेले सेल्फी लेने जैसी गतिविधियों के कारण पिता को कुछ गड़बड़ होने का संदेह हुआ।
एक रात जब किशोरी सो रही थी, तब पिता ने उसका स्मार्टफोन अनलॉक कर सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की।
WhatsApp, Instagram और Facebook से सामने आई ऑनलाइन दोस्ती
मोबाइल की जांच के दौरान परिवार को पता चला कि किशोरी WhatsApp, Instagram और Facebook के जरिए करीब 12 अलग-अलग युवकों के संपर्क में थी।
परिवार के लिए सबसे चिंता की बात यह थी कि ऑनलाइन संपर्क के दौरान किशोरी ने अपनी कुछ निजी तस्वीरें भी साझा की थीं। इसके बाद माता-पिता को साइबर सुरक्षा और संभावित ऑनलाइन शोषण को लेकर चिंता हुई।
आधी रात को घर में बढ़ा विवाद, 181 अभयम को किया फोन
माता-पिता ने रात में ही बेटी से इस बारे में बातचीत की। मामला समझाने के दौरान किशोरी और पिता के बीच बहस बढ़ गई। किशोरी अपनी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप किए जाने से नाराज थी, जिसके बाद घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थिति बिगड़ती देख मां ने 181 अभयम हेल्पलाइन पर संपर्क कर सहायता मांगी।
अभयम टीम ने करीब 4 घंटे की काउंसलिंग
सूचना मिलने के बाद 181 अभयम की टीम परिवार के घर पहुंची। टीम ने सबसे पहले परिवार के सदस्यों को अलग-अलग करके स्थिति को शांत किया। इसके बाद काउंसलर्स ने किशोरी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की।
करीब चार घंटे की काउंसलिंग के दौरान टीम ने किशोरी को डांटने या दोष देने के बजाय ऑनलाइन दुनिया से जुड़े संभावित खतरों को समझाने पर जोर दिया।
काउंसलर्स ने खास तौर पर इन खतरों के बारे में बताया:
डीपफेक का खतरा
AI तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर नकली और आपत्तिजनक सामग्री तैयार की जा सकती है।
ब्लैकमेलिंग का जोखिम
ऑनलाइन दोस्ती या बातचीत के बाद निजी जानकारी और तस्वीरों का इस्तेमाल दबाव बनाने, धमकी देने या आर्थिक फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है।
डिजिटल फुटप्रिंट
इंटरनेट पर एक बार साझा की गई निजी जानकारी या तस्वीर पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर निजी सामग्री साझा करते समय विशेष सावधानी जरूरी है।
काउंसलिंग के बाद किशोरी को समझ आया खतरा
अभयम टीम की काउंसलिंग के बाद किशोरी को ऑनलाइन संपर्कों से जुड़े संभावित जोखिमों का एहसास हुआ। उसने सोशल मीडिया के खतरों को समझा और परिवार के साथ बातचीत के लिए तैयार हुई।
टीम ने परिवार को भी सलाह दी कि किशोरी पर केवल सख्ती करने के बजाय उसके साथ खुला और भरोसेमंद संवाद बनाए रखा जाए। माता-पिता को उसकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ ऐसा माहौल बनाने की सलाह दी गई, जहां वह किसी परेशानी की स्थिति में बिना डर के परिवार से बात कर सके।



