
Gujarat Crop Disease: गुजरात के किसानों के लिए इस साल मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ मानसून की बेरुखी के कारण खेतों में नमी की कमी बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ राज्य की प्रमुख नकदी फसलों कपास और मूंगफली पर रोग और कीटों का हमला देखने को मिल रहा है। कपास में गुलाबी सुंडी और पैरा-विल्ट का प्रकोप किसानों की चिंता बढ़ा रहा है, जबकि मूंगफली की फसल में फफूंदजनित रोगों के लक्षण सामने आ रहे हैं।
कपास में गुलाबी सुंडी और पैरा-विल्ट का कहर
कपास की बुवाई के बाद इस बार किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अब कई इलाकों में फसल पर संकट मंडरा रहा है। कपास के पौधों में पैरा-विल्ट (सुकारा) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और कई पौधे खेत में खड़े-खड़े सूखने लगे हैं।
इसके साथ ही गुलाबी सुंडी के कारण कपास की फलियों और टिंडों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अगर समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो कपास की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।
मूंगफली में भी फंगल बीमारी का खतरा
कपास के साथ मूंगफली की फसल भी मुश्किल दौर से गुजर रही है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने और मौसम में बदलाव के कारण मूंगफली के खेतों में फफूंदजनित रोग, जैसे जड़ गलन और पत्ती धब्बा रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि कई जगहों पर पहले हरे-भरे दिखाई देने वाले मूंगफली के पौधे अब पीले पड़कर सूखने लगे हैं। बारिश नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
बारिश के इंतजार में किसान, भूजल स्तर भी गिरा
बारिश की कमी के बीच किसान कुएं, बोरवेल और ड्रिप सिंचाई के जरिए फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन लगातार सिंचाई के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे चला गया है, जिससे किसानों के सामने सिंचाई के पानी का संकट भी खड़ा हो गया है।
अब किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
नर्मदा का पानी गांवों तक पहुंचाने की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि नर्मदा नहर के जरिए पानी को जल्द से जल्द अंतिम छोर के गांवों तक पहुंचाया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला, तो नकदी फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों के मुताबिक ‘सौनी योजना’ के बावजूद कई इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में बारिश की कमी, घटता भूजल स्तर और फसल में बढ़ते रोग—तीनों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अगर आने वाले दिनों में राज्य में अच्छी और व्यापक बारिश नहीं होती है, तो किसानों को फसल नुकसान के साथ बड़ा आर्थिक झटका लगने की आशंका है।



