गुजरात के 10 तालुकों में 10 इंच भी बारिश नहीं, कच्छ-देवभूमि द्वारका और जामनगर में सूखे का संकट

Gujarat Rainfall Update: गुजरात में मानसून की स्थिति बेहद असमान बनी हुई है। जहां दक्षिण गुजरात में सीजन की सामान्य बारिश का 100 फीसदी आंकड़ा पूरा हो चुका है, वहीं राज्य के 10 तालुका ऐसे हैं जहां अब तक औसतन 10 इंच भी बारिश नहीं हुई है। सबसे चिंताजनक स्थिति देवभूमि द्वारका और कच्छ में दिखाई दे रही है। कम बारिश के कारण कृषि, जलस्तर और जलाशयों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

गुजरात के 10 तालुकों में बारिश बेहद कम

कम बारिश का सीधा असर जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है और कई क्षेत्रों में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। देवभूमि द्वारका के चार तालुका में सामान्य औसत की तुलना में 10 फीसदी से भी कम बारिश दर्ज हुई है।

सबसे खराब स्थिति द्वारका तालुका की है, जहां अब तक औसत बारिश का सिर्फ 2.28 फीसदी ही दर्ज किया गया है। कम बारिश का असर खेती पर भी पड़ रहा है। इस क्षेत्र में इस साल मूंगफली की बुवाई करीब 1,99,400 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल अक्टूबर तक यह आंकड़ा करीब 2,17,000 हेक्टेयर था।

किन तालुकों में सबसे कम बारिश?

तालुकाजिलाबारिश (इंच)औसत के मुकाबले
द्वारकादेवभूमि द्वारका0.592.28%
कल्याणपुरदेवभूमि द्वारका1.293.41%
पोरबंदरपोरबंदर2.959.34%
खंभालियादेवभूमि द्वारका3.589.54%
भाणवड़देवभूमि द्वारका3.039.75%
अबडासाकच्छ1.8510.28%
मांडवीकच्छ3.7016.94%
अंजारकच्छ3.8117.29%
लखपतकच्छ2.9920.27%
जामनगरजामनगर6.7320.41%

75 जलाशयों में जलस्तर 25 फीसदी से भी कम

कम बारिश का असर गुजरात के जलाशयों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। 1 सितंबर की स्थिति के अनुसार राज्य के 75 जलाशयों में जलस्तर 25 फीसदी से नीचे है।

वहीं, 44 जलाशयों में 25 से 50 फीसदी, 29 में 50 से 70 फीसदी, 31 में 70 से 100 फीसदी और 27 जलाशयों में 100 फीसदी जलस्तर दर्ज किया गया है।

देवभूमि द्वारका की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। यहां 12 जलाशयों में जलस्तर 10 फीसदी से भी कम है। दूसरी ओर, कच्छ के 20 बांधों में औसत जलस्तर 25 फीसदी से नीचे बताया गया है।

हालांकि राहत की बात यह है कि सरदार सरोवर बांध में जलस्तर 88.15 फीसदी दर्ज किया गया है।

जानकारों के अनुसार, आने वाले करीब दो सप्ताह सौराष्ट्र-कच्छ की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक सितंबर के दूसरे सप्ताह से मौसम प्रणाली सक्रिय होने पर इन इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना बन सकती है।

मूंगफली, कपास और बाजरा की बुवाई पिछले साल से कम

कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी नजर आ रहा है। देवभूमि द्वारका और कच्छ में कई प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में कम हुआ है।

देवभूमि द्वारका में फसल बुवाई

फसल20262025
अरहर0105
मूंग0903
उड़द3207
मूंगफली18942170
सोयाबीन3404
कपास3343
सब्जियां2630
चारा9999
अन्य सहित कुल21392364

कच्छ में फसल बुवाई

फसल20262025
बाजरा177263
ज्वार1305
अरहर18982
मूंग169323
कपास795778
सब्जियां79102
अन्य सहित कुल47566493

नोट: बुवाई के आंकड़े हेक्टेयर में हैं। वर्ष 2025 के आंकड़े 28 अक्टूबर और वर्ष 2026 के आंकड़े 31 अगस्त तक के हैं।

क्या गुजरात में सूखा घोषित हो सकता है?

किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला केवल इस आधार पर नहीं होता कि वहां कितनी बारिश हुई है। सामान्य तौर पर जून से सितंबर के दौरान सामान्य बारिश के 75 फीसदी से कम वर्षा होने पर सूखे जैसी स्थिति का आकलन किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ कई अन्य परिस्थितियों को भी देखा जाता है।

इसमें ड्राई स्पेल की अवधि, बुवाई में कमी, मिट्टी में नमी, फसल की स्थिति, भूजल स्तर और जलाशयों में उपलब्ध पानी जैसे कई मानदंड शामिल होते हैं।

इसलिए किसी तालुका में बारिश कम होना अपने आप में सूखा घोषित होने का अंतिम आधार नहीं है। सरकार द्वारा विभिन्न आंकड़ों और जमीनी स्थिति का आकलन करने के बाद क्षेत्रवार फैसला लिया जाता है।