
IIT Campus Placement Ban Companies: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) ने उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है, जिन्होंने छात्रों को नौकरी के ऑफर लेटर देने के बाद बाद में ऑफर वापस ले लिए या उन्हें नियुक्त नहीं किया। ऐसी 22 कंपनियों को आगामी दो कैंपस प्लेसमेंट सीजन में भाग लेने से रोक दिया गया है।
यह निर्णय इस महीने की शुरुआत में IIT गुवाहाटी में हुई ऑल इंडिया प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की बैठक में लिया गया। कार्रवाई का उद्देश्य ऑफर मिलने के बाद कंपनियों के पीछे हटने से प्रभावित छात्रों की समस्याओं को कम करना है।
22 कंपनियां अगले दो प्लेसमेंट सीजन से बाहर
प्लेसमेंट सीजन शुरू होने से पहले IIT छात्रों के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। जिन कंपनियों ने पहले छात्रों को नौकरी के ऑफर दिए थे, लेकिन बाद में उन्हें वापस ले लिया या ऑफर पूरा नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
कुल 22 कंपनियों को अगले दो कैंपस प्लेसमेंट सीजन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। यह प्रतिबंध अलग-अलग IIT परिसरों में होने वाली आगामी प्लेसमेंट प्रक्रिया पर लागू होगा।
IIT गुवाहाटी में AIPC की बैठक में फैसला
यह निर्णय ऑल इंडिया प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की बैठक में लिया गया। AIPC सभी IIT परिसरों में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप से संबंधित दिशानिर्देशों और समन्वय से जुड़ी केंद्रीय व्यवस्था है।
AIPC के सामने छात्रों को ऑफर मिलने के बाद कंपनियों द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया से पीछे हटने की समस्या रखी गई थी। इसके बाद समिति ने संबंधित कंपनियों के साथ आगामी प्लेसमेंट प्रक्रिया में सहयोग नहीं करने का फैसला किया।
‘ब्लैकलिस्टिंग’ नहीं, ‘नॉन-कोऑपरेशन’ कहा गया
AIPC ने इस कार्रवाई को ‘ब्लैकलिस्टिंग’ कहने के बजाय ‘नॉन-कोऑपरेशन’ की संज्ञा दी है।
AIPC के समन्वयक और IIT गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस के अनुसार, इन मामलों में 23 IITs की 150 से अधिक नौकरी की पेशकशें प्रभावित हुई हैं। कुछ कंपनियों ने 10 से 15 तक नौकरी के ऑफर वापस लिए थे।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दायरे में Oracle जैसी बड़ी वैश्विक कंपनी के साथ कुछ स्टार्टअप्स भी शामिल हैं।
प्रभावित छात्रों को दोबारा नौकरी दिलाने की कोशिश
ऑफर वापस लिए जाने के कारण जिन छात्रों की नियुक्ति प्रभावित हुई, उनकी मदद के लिए IIT के प्लेसमेंट कार्यालयों ने भी कदम उठाए हैं।
प्लेसमेंट कार्यालयों द्वारा प्रभावित छात्रों के CV मौजूदा भर्ती कंपनियों के साथ साझा किए गए हैं, ताकि उपलब्ध पदों के लिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अवसर मिल सके।
बताया गया है कि इस प्रयास के माध्यम से प्रभावित छात्रों में से करीब 20 से 30 प्रतिशत छात्रों को दोबारा नौकरी मिलने का अनुमान है।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
कैंपस प्लेसमेंट के दौरान नौकरी का ऑफर मिलने के बाद छात्रों की ओर से आगे की पढ़ाई, अन्य नौकरी के अवसर या व्यक्तिगत योजनाओं को लेकर निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में ऑफर वापस लिए जाने से छात्रों के सामने अचानक रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
IITs की इस कार्रवाई का उद्देश्य कंपनियों और छात्रों के बीच प्लेसमेंट प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखना और नौकरी के ऑफर के बाद कंपनियों द्वारा प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के मामलों को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।



