
Petrol and Diesel Price News: दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी जारी है। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की घोषणा की है। ऐसे में भारत के लिए इस मार्ग से पेट्रोलियम उत्पादों, LPG और LNG की आयात लागत बढ़ गई है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत के कच्चे तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन के आयात पर अतिरिक्त खर्च में भारी वृद्धि हुई है। इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हॉर्मुज संकट से बढ़ी भारत की आयात लागत
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जारी है। ईरान ओमान के साथ मिलकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को कड़ा किया है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस के समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ा है।
इस संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा आयात लागत पर भी पड़ा है। मार्च से अगस्त 2026 के दौरान समुद्र के रास्ते भारत आने वाले कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और LNG के लिए देश को लगभग 22 अरब डॉलर यानी करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करना पड़ा।
CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बाद भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें तेल आयात के लिए सबसे अधिक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
भारत का नेट एक्स्ट्रा फ्यूल खर्च 14.4 अरब डॉलर
CREA के अनुसार, सभी जीवाश्म ईंधनों को मिलाकर भारत का नेट अतिरिक्त खर्च करीब 14.4 अरब डॉलर रहा। यह देश के GDP का लगभग 0.38 प्रतिशत है।
वहीं, केवल कच्चे तेल के आयात पर भारत का नेट अतिरिक्त खर्च करीब 20.5 अरब डॉलर बताया गया है।
दुनिया ने छह महीने में 330 अरब डॉलर ज्यादा खर्च किए
हॉर्मुज संकट के बाद छह महीनों में दुनिया के जीवाश्म ईंधन आयातकों को कुल मिलाकर लगभग 330 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
इसमें:
- कच्चा तेल: 164.1 अरब डॉलर
- डीजल और गैस ऑयल: 73.8 अरब डॉलर
- पेट्रोल: 35.7 अरब डॉलर
- LNG: 38 अरब डॉलर
रिपोर्ट के अनुसार, संकट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत बाजार के पुराने अनुमानों की तुलना में औसतन 35 प्रतिशत अधिक रही। मार्च से अगस्त के दौरान ब्रेंट क्रूड का औसत भाव करीब 93 डॉलर प्रति बैरल रहा।
LPG भी हुआ महंगा
हॉर्मुज संकट के दौरान भारत को आयातित LPG के लिए भी अधिक कीमत चुकानी पड़ी। मार्च से अगस्त के बीच भारत ने LPG आयात के लिए लगभग 29 प्रतिशत अधिक कीमत चुकाई।
इसी अवधि में LPG आयात की मात्रा करीब 26 प्रतिशत घट गई। छह महीने का LPG आयात बिल लगभग 4.7 अरब डॉलर रहा, जिसमें करीब 1.1 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ा।
पेट्रोल-डीजल और गैस महंगी होने की आशंका
वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी और समुद्री परिवहन की बढ़ी लागत का दबाव आगे भी बना रहा तो इसका असर भारत के ईंधन बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल, LPG और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी कब और कितनी होगी, यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, आयात लागत, रुपये की विनिमय दर और घरेलू तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।



