
Saurashtra Coconut Farming: गुजरात की करीब 1,600 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा के आसपास बड़े पैमाने पर खेती होती है। राज्य में करीब 28,000 हेक्टेयर जमीन पर नारियल की खेती की जाती है। इसमें गिर सोमनाथ और जूनागढ़ जिले की हिस्सेदारी करीब 17,500 हेक्टेयर है। यही वजह है कि सौराष्ट्र गुजरात में नारियल उत्पादन और कारोबार का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
एक हेक्टेयर में औसतन करीब 177 नारियल के पेड़ लगाए जाते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में अच्छी मात्रा में उत्पादन प्राप्त होता है। सरकार की ओर से नारियल की नई और उन्नत किस्मों को बढ़ावा देने के साथ किसानों को प्रोत्साहन मिलने से जूनागढ़ और गिर सोमनाथ में हर साल नारियल का रकबा बढ़ रहा है।
सौराष्ट्र से हर साल 17 करोड़ हरे नारियल की बिक्री
सौराष्ट्र के नारियल कारोबार में गिर सोमनाथ की हिस्सेदारी सबसे बड़ी बताई जाती है। अकेले जूनागढ़ जिले से हर साल करीब 7 करोड़ नारियल की बिक्री होती है, जबकि पूरे सौराष्ट्र से यह आंकड़ा करीब 17 करोड़ नारियल तक पहुंच जाता है।
जूनागढ़ जिले में 6,770 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नारियल की खेती है। वहीं गिर सोमनाथ में करीब 11,000 हेक्टेयर जमीन पर नारियल के बाग हैं। इनमें अकेले वेरावल क्षेत्र में लगभग 6,500 हेक्टेयर में नारियल की खेती होती है।
बागवानी विभाग गिर सोमनाथ जिले में हर साल करीब 1,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को नारियल की खेती के दायरे में लाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है।
गुजरात में सालाना करीब 26 करोड़ नारियल का उत्पादन होने का अनुमान है। इनमें गिर सोमनाथ और सौराष्ट्र का बड़ा योगदान है। जूनागढ़ जिले में भी करीब 6.97 करोड़ नारियल के उत्पादन का आंकड़ा बताया गया है।
कृषि अधिकारी विशाल हदवाणी के अनुसार, क्षेत्र में किसान लोटण, देसी, टीडी, हाइब्रिड डीटी, फोसनोबा और बोना जैसी विभिन्न किस्मों की नारियल की खेती करते हैं।
किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन
नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए Coconut Development Board और कृषि विभाग की ओर से किसानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
पहले राज्य सरकार की योजना के तहत एक हेक्टेयर पर करीब 11,700 रुपये का प्रोत्साहन मिलता था। अब राज्य सरकार की योजना में चार हेक्टेयर तक सहायता का प्रावधान बताया गया है।
इसके तहत 37,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
वहीं, Coconut Development Board की योजना के तहत दो हेक्टेयर तक 16,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, यानी अधिकतम 32,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है।
हालांकि, किसान दोनों योजनाओं का एक साथ लाभ नहीं ले सकते और उन्हें उपलब्ध विकल्पों में से एक प्रोत्साहन चुनना होता है। ये प्रोत्साहन उन्नत/BT नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए बताए गए हैं।
सौराष्ट्र के कई इलाकों में नारियल की खेती
गिर सोमनाथ और जूनागढ़ के अलावा भावनगर के महुवा और तटीय क्षेत्र, वलसाड, कच्छ और देवभूमि द्वारका में भी नारियल की खेती की जाती है।
समुद्र के नजदीक का वातावरण और जलवायु नारियल की खेती के लिए अनुकूल होने के कारण सौराष्ट्र के तटीय इलाकों में नारियल के बाग तेजी से बढ़े हैं।
चोरवाड़ से मुंबई तक पहुंचता है सौराष्ट्र का हरा नारियल
सौराष्ट्र में नारियल की बिक्री के लिए पारंपरिक मार्केट यार्ड व्यवस्था के अलावा किसानों और व्यापारियों ने अपनी अलग सप्लाई चेन भी विकसित कर ली है।
मांगरोळ में कई जगह बागों से ही सीधे नारियल की खरीद होती है। वहां से ट्रकों के जरिए हरे नारियल को दूसरे राज्यों, खासकर मुंबई तक भेजा जाता है।
चोरवाड़ के आसपास कुकसवाड़ा और गडू जैसे क्षेत्रों में भी हरे नारियल का बड़ा कारोबार होता है। दक्षिण भारत से नारियल मंगाने पर लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ जाती है। ऐसे में सौराष्ट्र का उत्पादन पश्चिम और उत्तर भारत के बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धी विकल्प बनता है।
गडू से चोरवाड़, मांगरोळ और केशोद की ओर जाने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में नारियल के बाग दिखाई देते हैं। वहीं माधवपुर से पोरबंदर के तटीय पट्टे में भी जगह-जगह फैले नारियल के पेड़ इस क्षेत्र की अलग पहचान बनाते हैं।
यही कारण है कि सौराष्ट्र का नारियल अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।



