SIR Controversy 2026: NDA के 3 सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण, पारदर्शिता पर जोर

SIR Controversy Election Commission of India: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के तीन सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता लावु श्रीकृष्ण देव‍रायालु ने SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

चिराग पासवान ने कहा- चुनाव आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए

केंद्रीय मंत्री और LJP (राम विलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे किसी सरकार का बचाव करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा हो रहे हैं, तो आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखनी चाहिए।

पासवान के अनुसार, चुनाव व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए SIR से जुड़े सवालों और भ्रम को दूर करना जरूरी है।

उपेंद्र कुशवाहा ने भी मांगा स्पष्टीकरण

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी SIR को लेकर तत्काल स्पष्टीकरण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है और चुनाव आयोग को वास्तविक स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

इस तरह NDA के तीन सहयोगी दलों की ओर से सामने आए बयानों में चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग प्रमुख रही।

TDP ने पारदर्शिता पर दिया जोर

TDP के लोकसभा नेता लावु श्रीकृष्ण देव‍रायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई थी और मतदाताओं को अपनी चिंताएं दर्ज कराने के लिए समय और अवसर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि जब किसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं, तो चुनाव आयोग की ओर से उचित स्पष्टीकरण और पारदर्शिता जरूरी है। उनके मुताबिक इससे संस्था के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

विवाद की जड़ में क्या है?

यह विवाद एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियां SIR से संबंधित फैसलों को लेकर भी थीं। हालांकि, इन रिपोर्टों में सामने आए आंतरिक मतभेदों की व्याख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में लगाए गए आंतरिक मतभेद के दावों को खारिज करते हुए कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय या सुझाव आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इसलिए फिलहाल दो पक्ष सामने हैं—एक तरफ कुछ रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

SIR पर आगे भी जारी रह सकती है चर्चा

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसमें पात्र मतदाताओं के नामों को सुनिश्चित करने से जुड़ा है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न पक्षों की अलग-अलग चिंताएं सामने आई हैं।

NDA के तीन सहयोगी दलों द्वारा स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग किए जाने के बाद अब चुनाव आयोग की ओर से SIR से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या विस्तृत जानकारी दी जाती है, इस पर नजर रहेगी।