
USA Threat to India about Iran: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक को लेकर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने में मदद करेगा या उसके साथ प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाला व्यापार करेगा, उसके खिलाफ ट्रंप प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई।
मार्को रुबियो ने क्या कहा?
बिश्केक में SCO सम्मेलन के दौरान मोदी और पेजेशकियन की बैठक के बारे में सवाल पूछे जाने पर मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी नई व्यापारिक डील की जानकारी नहीं है।
हालांकि, उन्होंने अमेरिकी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए। अमेरिका का कहना है कि ईरान के साथ ऐसा व्यापार नहीं होना चाहिए जिससे वह प्रतिबंधों से बचकर आर्थिक संसाधन हासिल कर सके।
आतंकवाद और परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा
रुबियो ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि किसी देश को ऐसी व्यवस्था बनाने में मदद नहीं करनी चाहिए, जिससे ईरान को मिलने वाले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने या परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए किया जा सके।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि यदि कोई देश ईरान के साथ ऐसा व्यापारिक समझौता करता है जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है, तो उस देश पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
SCO में मोदी-पेजेशकियन की अहम मुलाकात
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई।
बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय तनाव और बढ़ते संघर्ष पर चर्चा की। दोनों देशों के बीच संबंधों और क्षेत्र में शांति कायम करने के प्रयासों को लेकर भी बातचीत हुई।
भारत ने बातचीत और कूटनीति को बताया रास्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि विवादों का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने क्षेत्र में समुद्री यातायात और मुक्त व्यापार की सुरक्षा पर भी जोर दिया। मोदी ने आम नागरिकों के साथ-साथ समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ईरानी राष्ट्रपति ने भारत से मांगी कूटनीतिक भूमिका
वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हालिया संघर्ष के दौरान भारत की ओर से मिले सहयोग की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए भारत से अपनी कूटनीतिक क्षमता का इस्तेमाल करने की अपील की।
पेजेशकियन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने के बजाय युद्ध और अस्थिरता का रास्ता चुना है।



