अचानक क्यों थम गई भारत में बारिश? सामने आई बड़ी वजह, मौसम विशेषज्ञों ने बताया कब लौटेगा मानसून

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश की गतिविधियों में आई कमी के पीछे अब एक बड़ी वजह सामने आई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में सक्रिय एक शक्तिशाली चक्रवात के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के बादल पूर्व दिशा की ओर खिंच गए हैं। इसका असर भारत के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहां फिलहाल बारिश में अस्थायी कमी और शुष्क मौसम का दौर बना हुआ है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और आने वाले समय में मानसून की गतिविधियां फिर से सामान्य होने की संभावना है।

दक्षिण भारत के लिए राहतभरा संकेत

यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच होने वाले पूर्वोत्तर मानसून के दौरान दक्षिण भारत में सामान्य से बेहतर बारिश हो सकती है।

पूर्वानुमान के मुताबिक, केरल, तमिलनाडु और श्रीलंका में औसत से अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जिससे कृषि, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।

एल-नीनो और पॉजिटिव IOD का असर

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि भले ही एल-नीनो की स्थिति मजबूत हो रही हो, लेकिन इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के सकारात्मक बने रहने की संभावना भी प्रबल है।

सकारात्मक IOD हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से को अधिक गर्म रखता है, जिससे भारत की ओर नमी का प्रवाह बढ़ता है। यही कारण है कि अरब सागर अधिक सक्रिय होकर दक्षिण भारत में बेहतर वर्षा की परिस्थितियां बना सकता है।

स्थानीय मौसम प्रणालियां निभाएंगी अहम भूमिका

पूर्वोत्तर मानसून मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवाओं और स्थानीय निम्न दबाव के क्षेत्रों पर निर्भर करता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन बेसिन में बनने वाली मौसमी प्रणालियां बादलों को पश्चिम की ओर धकेलेंगी, जिससे तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।

किसानों के लिए राहत की उम्मीद

विशेषज्ञों का कहना है कि मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की सक्रियता भी मानसून को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि अनुमान के अनुसार सामान्य से अधिक वर्षा होती है तो इससे रबी फसलों, भूजल स्तर और जलाशयों को पर्याप्त लाभ मिलेगा।

हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी क्षेत्र विशेष के लिए आधिकारिक मौसम चेतावनी और ताजा पूर्वानुमान के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी बुलेटिन पर ही भरोसा करें।