गांधी के गुजरात में ड्रग्स माफियाओं की ‘मौज’! 1,649 केस दर्ज, लेकिन सिर्फ 76 दोषी

Gujarat Drug Bust: महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि गुजरात में दशकों से शराबबंदी का कानून लागू है, लेकिन ड्रग्स के बढ़ते कारोबार को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। समुद्री और सड़क मार्ग से गुजरात में बड़ी मात्रा में ड्रग्स पहुंचाया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में 65,548 किलोग्राम ड्रग्स, 45,544 नशीली टैबलेट और 4,843 लीटर तरल ड्रग्स जब्त किया गया है। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में करीब 121 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला कोकीन भी पकड़ा गया है।

3 साल में 1,649 मामले दर्ज, लेकिन सिर्फ 76 आरोपी दोषी

गुजरात में ड्रग्स से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों और दोषसिद्धि के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में ड्रग्स से संबंधित कुल 1,649 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इन मामलों में अब तक केवल 76 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 508 ड्रग्स से जुड़े मामले दर्ज हुए, जिनमें 8 आरोपी दोषी ठहराए गए। वर्ष 2023 में 651 मामले दर्ज हुए और 34 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। वहीं, वर्ष 2024 में 490 मामले दर्ज हुए और 34 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।

गुजरात में तीन साल में कितनी ड्रग्स पकड़ी गई?

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2024 के बीच गुजरात में बड़ी मात्रा में अलग-अलग प्रकार की ड्रग्स जब्त की गई।

  • 2022: 28,230 किलोग्राम ड्रग्स, 165 नशीली टैबलेट और 1,242 लीटर तरल ड्रग्स
  • 2023: 23,014 किलोग्राम ड्रग्स, 33,338 नशीली टैबलेट और 2,413 लीटर तरल ड्रग्स
  • 2024: 13,304 किलोग्राम ड्रग्स, 12,041 नशीली टैबलेट और 1,188 लीटर तरल ड्रग्स
  • कुल: 65,548 किलोग्राम ड्रग्स, 45,544 नशीली टैबलेट और 4,843 लीटर तरल ड्रग्स

इसके अलावा पिछले दो वर्षों में करीब 121 किलोग्राम कोकीन जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

कमजोर जांच और चार्जशीट का फायदा?

ड्रग्स से जुड़े मामलों में आरोपियों को अदालत से राहत मिलने को लेकर पुलिस जांच और अभियोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जांच में कमी, चार्जशीट में कानूनी खामियां और आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाने की कमी जैसे कारण मामलों को कमजोर कर सकते हैं।

डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक जांच और वैज्ञानिक तरीके से चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखना ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि जांच और साक्ष्यों की प्रक्रिया में खामियां रह जाती हैं, तो इसका लाभ आरोपियों को मिल सकता है।

युवा पीढ़ी पर बढ़ता खतरा

ड्रग्स की बड़ी मात्रा में जब्ती के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि पुलिस की नजर से बचकर कितना नशीला पदार्थ बाजार तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों के बीच इसे लेकर चिंता बढ़ रही है।

ड्रग्स की बढ़ती उपलब्धता का सबसे गंभीर असर युवा पीढ़ी पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल ड्रग्स की जब्ती और मामले दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामलों की प्रभावी जांच, मजबूत अभियोजन और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करना जरूरी है।