
GST कटौती को एक साल पूरा, लेकिन बढ़ती लागत ने कीमतों में कमी का फायदा काफी हद तक कम किया
India Inflation News: GST दरों में युक्तिसंगत बदलाव को एक साल पूरा हो गया है। शुरुआत में टैक्स दरों में कटौती का फायदा खाद्य पदार्थों से लेकर कंज्यूमर गुड्स और ऑटोमोबाइल तक कई क्षेत्रों को मिला और इससे मांग में तेजी आई। हालांकि, कच्चे माल, कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के साथ पश्चिम एशिया के संकट ने बाद में लागत बढ़ा दी, जिससे GST कटौती से मिलने वाली कीमतों की राहत काफी हद तक कम हो गई।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा
रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, GST दरों में कटौती का सबसे स्पष्ट असर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में देखने को मिला। अगस्त 2026 तक पिछले एक साल में करीब 2.9 करोड़ वाहन बिके। 21 सितंबर तक यह आंकड़ा लगभग 3 करोड़ वाहनों तक पहुंच गया। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है।
इस दौरान:
- यात्री वाहनों की बिक्री में 22 प्रतिशत वृद्धि हुई।
- दोपहिया वाहनों की बिक्री 20 प्रतिशत बढ़ी।
- वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 19 प्रतिशत वृद्धि हुई।
- ट्रैक्टरों की बिक्री 23 प्रतिशत बढ़ी।
इक्रा के कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और ग्रुप हेड जितिन मक्कार के अनुसार, पिछले 11-12 महीनों में GST दरों के लागू होने से भारत में खपत और मांग को महत्वपूर्ण गति मिली।
SIAM ने भी मांग में मजबूती की बात कही
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के महानिदेशक राजेश मेनन ने अगस्त में कहा था कि पिछले छह महीनों में वाहन निर्माताओं के उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों में भी इसका असर दिखाई दिया है। इससे व्यापक स्तर पर मांग के मजबूत होने के संकेत मिले।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले महीने की वृद्धि को पिछले वर्ष के कम आधार का भी समर्थन मिला था।
कंज्यूमर गुड्स में कीमतें घटीं, फिर बढ़ीं
GST दरों में बदलाव के दौरान कई कंज्यूमर गुड्स पर टैक्स दर को 12 या 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया था। इससे कई उत्पादों की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की कमी आई थी।
लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण कच्चे माल, ऊर्जा और ईंधन की लागत में वृद्धि हुई। इसके चलते कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 6-7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को अभी भी करीब 2-3 प्रतिशत की कीमत राहत मिलने की बात कही गई है।
मांग पर अलग-अलग आकलन
नेस्ले इंडिया के अनुसार, GST दरों में कटौती ने खपत में सकारात्मक गति पैदा की। वहीं, उपभोक्ता विश्लेषक रोनक शाह का कहना है कि दरों में कटौती से उत्पादों की वहनीयता जरूर बढ़ी, लेकिन इसका असर सभी कंज्यूमर कंपनियों की मांग में समान रूप से दिखाई नहीं दिया।
उनके अनुसार, GST कटौती ने महंगाई के दबाव से कुछ हद तक राहत दी, लेकिन इससे हर उत्पाद श्रेणी में खपत में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई।
त्योहारी सीजन में कपड़ों की कीमत बढ़ने की आशंका
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुख्य सलाहकार राहुल मेहता के अनुसार, GST 2.0 का असर कीमतों में इतनी बड़ी कमी के रूप में नहीं दिखा, जितनी उम्मीद की जा रही थी।
उनका अनुमान है कि इस साल त्योहारी सीजन के दौरान परिधान पर होने वाला खर्च 8-10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यदि ब्रांड, खुदरा विक्रेता और निर्माता बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन भी करते हैं, तब भी उत्पादों की कीमतों में 5-7 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है।



