
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स 1,200 से अधिक अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 23,100 के स्तर से भी नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67% गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64% की गिरावट के साथ 23,063.10 पर बंद हुआ।
बाजार खुलते ही शुरू हुई तेज बिकवाली
बुधवार को सेंसेक्स 74,828.25 और निफ्टी 23,446.80 पर बंद हुए थे। गुरुवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दबाव में कारोबार शुरू किया। दिन बढ़ने के साथ बिकवाली और तेज होती गई।
दोपहर करीब 2:15 बजे सेंसेक्स लगभग 73,673 के स्तर पर और निफ्टी करीब 23,076 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद भी बाजार में दबाव बना रहा और दोनों सूचकांक दिन के निचले स्तरों के करीब बंद हुए।
निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट
बाजार में व्यापक बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे निवेशकों की कुल बाजार पूंजी में एक ही कारोबारी सत्र में बड़ी कमी आई।
NSE की लिस्टिंग के बीच बाजार में गिरावट
गुरुवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग भी हुई। ₹22,561 करोड़ से अधिक के आईपीओ के बाद NSE के शेयर बीएसई पर ₹1,800 के भाव पर सूचीबद्ध हुए, जबकि इसका निर्गम मूल्य ₹1,785 था। यानी शेयर ने करीब 0.8% प्रीमियम के साथ शुरुआत की।
NSE का बाजार पूंजीकरण लिस्टिंग के बाद करीब ₹4.45 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया और यह भारत की सूचीबद्ध दूसरी स्टॉक एक्सचेंज कंपनी बन गई।
हालांकि, NSE की लिस्टिंग के बीच व्यापक बाजार में भारी बिकवाली जारी रही।
शेयर बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण
1. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी बाजार के लिए सबसे प्रमुख दबावों में रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्च स्तरों तक पहुंच गई। इससे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव आया।
2. कच्चा तेल 100 डॉलर के पार
कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ कारोबार में यह करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा तेल महंगाई और व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ा सकता है।
3. वैश्विक बाजारों में कमजोरी
अमेरिकी बाजारों में गिरावट और दुनिया के अन्य बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। ऊंची बॉन्ड यील्ड, महंगे तेल और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
4. रुपये और ब्याज दरों को लेकर चिंता
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती के बीच रुपये पर भी दबाव बना। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावनाओं ने बाजार में चिंता बढ़ाई। इन सभी कारकों का असर बैंकिंग, वित्तीय और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
आगे बाजार के लिए क्या महत्वपूर्ण रहेगा?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। इन संकेतकों में बदलाव से भारतीय बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।



